मनुष्य को फल की चिंता किए बिना सिर्फ कर्म करना चाहिए
सैकड़ों महिलाओं ने हवन में डाली आहुतियां, कृष्णमय हुआ क्षेत्र
- सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
- राजीव कालोनी झंडा चौक में भागवत महापुराण का भव्य समापन, भंडारे में उमड़ी भीड़
- पंडित कुलदीप महाराज ने गीता पाठ से दिया मानवता का संदेश
मंडला महावीर न्यूज 29. जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम पंचायत देवदरा अंतर्गत आने वाले राजीव कॉलोनी, झंडा चौक में बीते सात दिनों से चल रही आस्था और आध्यात्म की अविरल गंगा का भव्य समापन हो गया। यहाँ सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की महिला मंडल द्वारा आयोजित इस धाार्मिक कार्यक्रम के अनूठे प्रयास से सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें और अंतिम दिवस कथा स्थल पर भक्ति का चरमोत्कर्ष देखने को मिला। सुप्रसिद्ध कथावाचक देवगाँव वाले पंडित कुलदीप महाराज के मुखारविंद से बरस रहे भजनों और भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य व अलौकिक लीलाओं के वर्णन को सुनकर पूरा क्षेत्र पूरी तरह कृष्णमय और शिवमय नजर आया।

सच्ची मित्रता की मिसाल, सुदामा चरित्र का जीवंत प्रसंग
कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से पंडित कुलदीप महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक ढंग से श्रवण कराया। महाराज जी ने बताया कि मित्रता में धन, पद और प्रतिष्ठा का कोई स्थान नहीं होता, वहाँ केवल निष्कपट प्रेम होता है। जब दरिद्रता से त्रस्त सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर द्वारिकाधीश से मिलने पहुंचे, तो प्रभु ने राजा होते हुए भी मित्रता की लाज रखी। श्रीकृष्ण ने न केवल नंगे पैर दौड़कर सुदामा को गले लगाया, बल्कि अपने आंसुओं से उनके पैर धोए। सुदामा द्वारा लाए गए चावल के दाने को बड़े चाव से खाकर प्रभु ने अपने मित्र को बिना मांगे ही तीनों लोकों का वैभव दान कर दिया। इस प्रसंग के दौरान भावुक कर देने वाले भजनों पर श्रद्धालु अपने आंसू नहीं रोक पाए।
राजा परीक्षित ने मोक्ष के लिए गंगा तट पर किया भागवत कथा का श्रवण
कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी ने राजा परीक्षित के मोक्ष की अमर कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि श्रृंगी ऋषि के श्राप के कारण राजा परीक्षित को सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से मृत्यु प्राप्त होनी थी। मृत्यु के भय से मुक्त होने और आत्म-कल्याण के लिए राजा परीक्षित ने शुकदेव जी के मुख से सात दिनों तक गंगा तट पर इस परम पवित्र भागवत कथा का श्रवण किया। सातवें दिन जब तक्षक नाग राजा को डसने आया, तब तक राजा परीक्षित भागवत रस का पान कर स्वयं को ईश्वर में विलीन कर चुके थे। वे देह-अभिमान से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त हुए। महाराज जी ने संदेश दिया कि भागवत कथा का मुख्य उद्देश्य ही मनुष्य को मृत्यु के भय से मुक्त कर परमात्मा के चरणों में स्थान दिलाना है।
गीता पाठ का पावन संदेश-कर्म ही पूजा है
कथा के अंतिम सत्र में पंडित कुलदीप महाराज ने श्रीमद्भागवत गीता के श्लोकों और पाठ के माध्यम से समाज को एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश किसी एक धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से पूरी दुनिया को सिखाया कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना केवल अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। संसार में जो भी आया है, उसे खाली हाथ ही जाना है, इसलिए जीवन में अहंकार का परित्याग कर, दीन-दुखियों की सेवा और धर्म के मार्ग पर चलना ही सच्चा मानव धर्म है।
लड्डू गोपाल का अभिषेक, वृहद हवन और विशाल भंडारा आयोजित
श्रीमद् भागवत पुराण के अंतिम दिन सुबह सर्वप्रथम भगवान लड्डू गोपाल का पंचामृत से विशेष अभिषेक और दिव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद दोपहर को संगीतमय कथा का वाचन संपन्न हुआ। महापुराण की पूर्णाहुति के अवसर पर भव्य हवन-पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालीं। इस दौरान मातृशक्ति की सहभागिता सबसे ज्यादा रही। सैकड़ों महिलाओं ने एक साथ मंत्रोच्चार के बीच आहुति देकर क्षेत्र की सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। महाआरती के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें देर शाम तक हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की महिला मंडल और समस्त राजीव कॉलोनी वासियों का सराहनीय योगदान रहा।










