रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक और जैविक कृषि अपनाए

अधिकारियों और ग्रामीणों ने लिया प्रकृति रक्षा का संकल्प

रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक और जैविक कृषि अपनाने पर दिया जोर

  • थानमगांव वॉटरशेड क्षेत्र में नाबार्ड और प्रदान संस्था की पहल
  • विश्व पर्यावरण दिवस पर किया गया व्यापक पौधारोपण

मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) एवं प्रदान संस्था की संयुक्त पहल पर निवास विकासखंड के थानमगांव वाटरशेड क्षेत्र में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष 2026 के पर्यावरण दिवस की मुख्य थीम के अनुसार कार्यक्रम का मूल उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण को बढ़ावा देना रहा।इस कार्यक्रम में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक देवव्रत पाल, वित्तीय साक्षरता अधिकारी कृष्ण कुमार अवस्थी, प्रदान संस्था से अनुरुद्ध शास्त्री, कृषि विकास अधिकारी पंकज धुर्वे और आजीविका मिशन से वंदना पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और वॉटरशेड विकास समिति के सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों और महिला स्व-सहायता समूहों ने बेहद सक्रिय भागीदारी निभाई। उपस्थित अतिथियों ने स्वयं पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और ग्रामीणों से इस अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

प्राकृतिक खेती और जल संवर्धन पर विशेष फोकस 

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पर्यावरण संतुलन में वृक्षों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेड़ न सिर्फ हवा को शुद्ध करते हैं, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए वक्ताओं ने किसानों से रासायनिक खाद का उपयोग बंद कर प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। इसके लिए उन्होंने खेतों में बायोचार इकाई, वर्मी कंपोस्ट (केचुआ खाद) और अन्य जैविक खादों व प्राकृतिक कीटनाशकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित ग्रामीणों ने रोपे गए पौधों की नियमित देखभाल करने और उन्हें सुरक्षित वृक्ष के रूप में विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया।


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