पक्के निर्माणों पर खामोशी, गरीबों के ठेलों पर कार्रवाई
घुघरी अतिक्रमण मुहिम: बस स्टैंड तो हुआ साफ, लेकिन ठेलों पर चला बुलडोजर
- अब गरीबों के सामने गहराया रोजी-रोटी का संकट
- विस्थापित दुकानदारों ने प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप
मंडला महावीर न्यूज 29. घुघरी के स्थानीय बस स्टैंड परिसर में लंबे समय से व्याप्त अतिक्रमण की समस्या पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल ही गया। एसडीएम सचिन जैन के निर्देशन में राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से दुकानों के बाहर अवैध रूप से लगे टिन शेड, तिरपाल और डिवाइडर के आसपास के कब्जों को पूरी तरह हटा दिया। इस कार्रवाई से बरसों से संकीर्ण नजर आने वाला बस स्टैंड अब साफ और खुला-खुला नजर आ रहा है, जिससे आम राहगीरों ने राहत की सांस ली है।
जानकारी अनुसार इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का एक दूसरा और बेहद दर्दनाक पहलू भी सामने आया है। जनपद रोड पर ठेला लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले गरीब और छोटे व्यापारियों के सामने अब आजीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा इन छोटे दुकानदारों को 24 घंटे के भीतर ठेले हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है, जिससे गरीब परिवारों में हाहाकार मचा हुआ है।
नहीं सुनी गई बीच का रास्ता निकालने की गुहार
प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन और ग्राम पंचायत उन्हें नदी किनारे बाजार हाट में जाने को कह रहे हैं, लेकिन वह क्षेत्र बरसात के दिनों में बाढ़ के कारण पूरी तरह डूब जाता है और वहाँ कोई बाजार भी नहीं लगता। व्यापारियों ने प्रशासन से बीच का रास्ता निकालने की गुहार लगाते हुए कहा था कि ठेलों के पीछे स्थित थाने की शासकीय जमीन की तरफ वे अपने ठेलों को महज 2 फीट पीछे हटा लेंगे जिससे यातायात भी बाधित न हो और उनका रोजगार भी बच जाए, लेकिन प्रशासन ने उनकी एक न सुनी।
कार्रवाई पर उठे सवाल, पक्षपात का आरोप
उजड़ते रोजगार के बीच पीडि़त दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की इस मुहिम पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि घुघरी में कई रसूखदार और बड़े लोग शासकीय जमीनों पर दो-दो मंजिला पक्के मकान तानकर बैठे हैं, लेकिन उनके अवैध निर्माणों को छुआ तक नहीं जा रहा है। कार्रवाई की गाज सिर्फ रोज कमाने-खाने वाले गरीबों के ठेलों पर ही गिराई जा रही है।
पुनर्वास की उठ रही मांग
अतिक्रमण विरोधी इस कार्रवाई में तहसीलदार सीके बट्टे, थाना प्रभारी पूजा बघेल सहित पूरा राजस्व और पुलिस अमला मुस्तैद रहा। प्रशासन ने दोबारा कब्जा करने पर सामान ज़ब्ती की सख्त चेतावनी दी है। वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का कहना है कि सुचारू यातायात के लिए व्यवस्था बनाना जरूरी है, लेकिन प्रशासन को इन गरीब और बेसहारा परिवारों के लिए तत्काल किसी सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए, अन्यथा इन परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी।
इनका कहना है
मैं छोटे से ठेले से परिवार की रोटी का इंतजाम करता हूँ। हम गरीबों का रोजगार उजाड़ा जा रहा है, जबकि रसूखदारों के अतिक्रमण पर प्रशासन मौन है। यह सरासर अन्याय है।
रामनारायण शुक्ला, पान ठेला संचालक
मैं सुबह कमाता हूँ तब शाम को घर का चूल्हा जलता है। बड़े लोग शासकीय जमीनों पर पक्के मकान बनाकर बैठे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
दुखुआ प्रसाद अहिरवार, दुकानदार
सड़क हादसे में पति की मौत के बाद मैं सिलाई करके तीन बच्चों का पेट पालती हूँ। सुबह की कमाई से शाम का राशन आता है। यह सहारा छिन गया तो बच्चों को क्या खिलाऊँगी।
शकुंतला वंदेवार










