मासूमों पर भारी नौतपा, 45 डिग्री के टॉर्चर में खुल रहे आंगनबाड़ी केंद्र
बीमार होने के डर से बच्चों ने बनाई दूरी
- भीषण गर्मी में बंद हों आंगनबाड़ी, बच्चों की जगह माताओं को मिले सूखा राशन
- नारायणगंज क्षेत्र के सरपंचों और ग्रामीणों की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले में इन दिनों नौतपा के चलते पारा 45 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। आसमान से बरसते अंगारों और भीषण लू के बीच जहां शासन ने प्राथमिक शाला से लेकर हायर सेकेंडरी तक के स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दी हैं, वहीं आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्ने बच्चों को इस चिलचिलाती धूप में तपने के लिए छोड़ दिया गया है।
नारायणगंज विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरी कला और ग्राम पंचायत बबलिया माल सहित अनेक पंचायतों के सरपंचों व ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि इस भीषण गर्मी में भी सुबह 11.30 बजे तक मासूम बच्चों को केंद्रों में बिठाया जा रहा है। दोपहर की खौफनाक धूप में जब ये बच्चे घर लौटते हैं, तो उन्हें लू लगने और बीमार होने का गंभीर खतरा बना रहता है। इस असहनीय तपिश के कारण अब बच्चों ने आंगनबाडिय़ों से दूरी बना ली है, जिससे केंद्रों में उपस्थिति नाम मात्र की रह गई है।
अफसर पंखे की हवा में, केंद्रों में न कूलर न पंखा
ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारी तो खुद दफ्तरों में एसी और पंखे की हवा खा रहे हैं, लेकिन नौनिहालों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। क्षेत्र के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में न तो पंखे चालू हैं और न ही कूलर की कोई व्यवस्था है। पलकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चों को भेजना सीधे बीमारी को बुलावा देना है। ग्रामीणों की मांग है कि इस मौसम में बच्चों को केंद्र बुलाने के बजाय सूखा पोषण आहार सीधे उनकी माताओं को सौंप दिया जाना चाहिए, जिससे बच्चे घर पर सुरक्षित रहकर नियमित रूप से पोषण प्राप्त कर सकें।
इनका कहना है
जैसे प्राथमिक शाला से लेकर हायर सेकेंडरी तक के स्कूलों में गर्मी की छुट्टी दी जाती है, ठीक उसी तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों में भी छोटे बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया जाना चाहिए।

देवचरण पंद्राम, सरपंच, ग्राम पंचायत देवरी कला
नौतपा जैसी जानलेवा गर्मी में आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी होना बेहद आवश्यक है। शासन-प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए। दो माह के लिए बच्चों का सूखा पोषण आहार सीधे उनकी मां को दिया जाए, ताकि बच्चे घर में सुरक्षित रहकर तंदुरुस्त बन सकें। प्रशासन से हमारी यही मांग है।

रूप सिंह पंद्राम, सरपंच, ग्राम पंचायत बबलिया माल










