संत अनिल बाबा कर रहे पंचाग्नि कठोर साधना

लोक कल्याण और अच्छी बारिश के लिए पंचाग्नि के बीच बैठे संत श्री 108 अनिल बाबा

बिझोली दरबार में संत अनिल बाबा का अग्नि तप शुरू

  • नौतपा की भीषण गर्मी में कर रहे कठोर साधना
  • आस्था का अद्भुत नजारा, दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

मंडला महावीर न्यूज 29. निवास क्षेत्र के प्रसिद्ध आस्था केंद्र ग्राम बिझोली स्थित मां विंध्यवासिनी माता दरबार में इन दिनों धर्म, आस्था और घोर तपस्या का एक अनूठा व अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। ज्येष्ठ माह के नौतपा की इस भीषण और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच सुप्रसिद्ध संत श्री श्री 108 अनिल बाबा लोक कल्याण की कामना के लिए अखाड़े की धूनी और पंचाग्नि के बीच बैठकर अग्नि तप कर रहे हैं।संत अनिल बाबा ने बताया कि यह अत्यंत कठिन और अलौकिक तपस्या क्षेत्र में सुख-शांति, आगामी मानसूनी सीजन में अच्छी वर्षा, समृद्धि और संपूर्ण जनकल्याण की भावना के साथ की जा रही है। नौतपा के सभी 9 दिनों तक वे जलती हुई पंचाग्नि के बीच बैठकर दिन-रात मां विंध्यवासिनी की विशेष आराधना और मंत्र जाप करेंगे। इस अलौकिक और विहंगम दृश्य के दर्शन करने और संत श्री का आशीर्वाद लेने के लिए बिझोली दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रीय लोग पहुँच रहे हैं।

अग्नि तप का महत्व 

अग्नि तप सनातन धर्म में एक बेहद कठिन और सर्वोच्च धार्मिक साधना मानी गई है। संत अनिल बाबा ने बताया कि यह तप नौतपा के दौरान जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब धरती पर भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे समय में साधक अपने चारों ओर उपलों (कंडों) या लकडिय़ों की आग जलाता है और ऊपर से सूर्य की प्रचंड तपिश को सहते हुए एकाग्रचित्त होकर ध्यान लगाता है। इसमें चार दिशाओं में जलने वाली अग्नि और पांचवें सूर्य देव के ताप को मिलाकर इसे पंचाग्नि तप कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संतों द्वारा किए जाने वाले इस कठोर तप से देवराज इंद्र प्रसन्न होते हैं, जिससे क्षेत्र में समय पर और अच्छी मानसूनी बारिश होती है और अकाल व महामारियों से रक्षा होती है।


रिपोर्टर- रोहित प्रशांत चौकसे


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