भक्ति के आगे फीकी पड़ी भीषण गर्मी

अगाध श्रद्धा-पुरुषोत्तम मास में मां नर्मदा की पंचकोशी यात्रा

चिलचिलाती धूप में नंगे पैर परिक्रमा कर रहे श्रद्धालु

  • भक्ति के आगे फीकी पड़ी भीषण गर्मी
  • नर्मदा परिक्रमा कर रहे भक्त मुकेश ताम्रकार बने प्रेरणा स्रोत
  • जगह-जगह हुआ बालभोग और शीतल जल का वितरण

मंडला महावीर न्यूज 29. अध्यात्म और अगाध आस्था की भूमि मंडला में इन दिनों पावन पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मां नर्मदा की पंचकोशी यात्रा पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ निकाली जा रही है। एकादशी के पावन अवसर पर नर्मदा तटों और परिक्रमा पथ पर भक्तों का एक अनूठा सैलाब देखने को मिला। इस यात्रा में भक्तों की ऐसी अद्भुत श्रद्धा देखने को मिल रही है, जिसके सामने भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की तपिश भी पूरी तरह फीकी साबित हो रही है।

नंगे पैर परिक्रमा कर रहे भक्त मुकेश बने प्रेरणा स्रोत 

पंचकोशी यात्रा के दौरान परिक्रमा पथ पर आस्था का एक ऐसा ही अनूठा दृश्य देखने को मिला, जहां एक श्रद्धालु चिलचिलाती धूप और तपती जमीन पर पैरों में बिना कुछ पहने नंगे पैर ही निरंतर मां नर्मदा की परिक्रमा कर रहे हैं। विगत कई वर्षों से मां नर्मदा की उत्तर वाहिनी परिक्रमा मुकेश ताम्रकार कर रहे है। मुकेश इस पुरुषोत्तम मास में भी वे पूरी निष्ठा के साथ पंचकोशी यात्रा की परिक्रमा करते हुए नजर आ रहे हैं। मां नर्मदा के प्रति उनकी यह अटूट श्रद्धा, भक्ति और अटूट विश्वास आज क्षेत्र के तमाम भक्तों और आम नागरिकों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुका है। उपस्थित जनों ने उनकी इस निस्वार्थ साधना को कोटि-कोटि नमन किया। परिक्रमा कर रहे श्रृद्धालुओं का कहना है कि भक्ति के सामने अपने अहंकार और सांसारिक चिंताओं को ईश्वर के चरणों में पूरी तरह समर्पित कर देना ही सच्ची आस्था है, जिससे मन को असीम और अलौकिक शांति प्राप्त होती है।

जगह-जगह हुआ बाल भोग और शीतल जल का वितरण 

पुण्य लाभ कमाने और सेवा भाव को चरितार्थ करने के उद्देश्य से परिक्रमा मार्ग में विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों द्वारा जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए। इस दौरान परिक्रमा में निकले सैकड़ों थके-हारे भक्तों को आदरपूर्वक रोककर बाल भोग, ठंडे व शीतल पेयजल सहित सीजन के ताजे फलों का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं की सेवा का यह सिलसिला सुबह से लेकर देर शाम तक लगातार चलता रहा। संपूर्ण परिक्रमा मार्ग नर्मदे हर के जयकारों से गूंजता रहा, जिससे पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और आनंदमयी हो गया।


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