‘जल संरक्षण अब मात्र नीति नहीं, राष्ट्र निर्माण का हिस्सा’-सीएम डॉ. मोहन यादव

जल गंगा संवर्धन अभियान

‘जल संरक्षण अब मात्र नीति नहीं, राष्ट्र निर्माण का हिस्सा’-सीएम डॉ. मोहन यादव

  • गंगा दशहरा को मुख्यमंत्री ने बताया जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व
  • मध्यप्रदेश में ₹2500 करोड़ से हो रहे जल संरचनाओं के कार्य

भोपाल/मंडला महावीर न्यूज 29. गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने अपने ब्लॉग के माध्यम से भारतीय संस्कृति में नदियों और जल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गंगा दशहरा वास्तव में ‘जल के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व’ है। उन्होंने देश और राज्य में चल रहे जल संरक्षण के प्रयासों को राष्ट्र निर्माण का एक अनिवार्य हिस्सा बताया।

पीएम मोदी के विजन से जल संरक्षण बना जन आंदोलन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश में जल को विकास का प्रमुख पैमाना बनाया गया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे और कैच द रेन जैसे ऐतिहासिक अभियानों ने देश को जल सुरक्षा दी है।

उन्होंने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत देश भर में निर्मित हुए 70 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का जिक्र करते हुए कहा कि इन प्रयासों से भूजल स्तर (Groundwater Level) में सुधार हुआ है और भावी पीढ़ी के लिए एक जल-समृद्ध भारत का आधार तैयार हो रहा है।

मध्यप्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की धूम

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध मध्यप्रदेश जल संरक्षण की दिशा में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। प्रदेश में चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ इसी संकल्प का परिणाम है, जो इस वर्ष (2026) भी पूरे जोर-शोर से जारी है।

अभियान के मुख्य बिंदु और उपलब्धियां:

  • भारी-भरकम बजट: प्रदेश में जल संरचनाओं के कायाकल्प के लिए लगभग ₹2,500 करोड़ की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं।

  • संरचनाओं का जीर्णोद्धार: अभियान के तहत 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम का संधारण (रखरखाव) तथा हजारों पारंपरिक तालाबों, कुओं और ऐतिहासिक बावड़ियों का गहरीकरण व सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।

  • सामुदायिक सहभागिता: ‘पानी चौपाल’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलों और ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

कृषि प्रधान मध्यप्रदेश के लिए जल ही आधार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर पानी और किसानों की समृद्धि से जुड़ी है। अनियमित वर्षा और गिरते भूजल स्तर जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए खेत तालाब और ‘रिज-टू-वैली’ मॉडल अपनाए जा रहे हैं, जिससे किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।

मुख्यमंत्री की अपील:

“यह अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प है। स्वच्छ, समृद्ध और जल-संपन्न मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब प्रदेश का हर नागरिक जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी उठाएगा। आइए, इस गंगा दशहरा पर हम सब मिलकर जल बचाने का संकल्प लें।”


 (लेखक – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मध्यप्रदेश )


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