पेयजल संकट पर एक्शन में सरकार
कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश, पानी से जुड़े पूरे अमले की छुट्टियों पर लगा बैन
- सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव ने ली हाई-लेवल बैठक
- कलेक्टर रोज करेंगे समीक्षा
- बोरवेल खनन के लिए ₹1500 करोड़ जारी
भोपाल/मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में पेयजल व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने रविवार (24 मई 2026) को प्रदेश के सभी कलेक्टर्स, नगरीय निकाय, पंचायत और पीएचई (PHE) विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक आपात बैठक की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेयजल संबंधी जनसमस्याओं का प्रतिदिन त्वरित निराकरण किया जाए।
पेयजल संकट की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई और जल निगम के समस्त अमले के अवकाश (छुट्टियों) पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अब केवल अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अवकाश स्वीकृत किए जा सकेंगे।
कलेक्टर खुद लीड करेंगे ‘सेंट्रल कंट्रोल रूम’
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ‘सेंट्रल कंट्रोल रूम’ स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम की कमान स्वयं कलेक्टर संभालेंगे। इसके साथ ही अधिकारियों की एक विशेष समिति बनाकर प्रतिदिन पेयजल उपलब्धता की समीक्षा की जाएगी। सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और जनप्रतिनिधियों से मिलने वाली शिकायतों का न्यूनतम समय में निपटारा करना अनिवार्य होगा।
बिजली कनेक्शन काटने पर रोक, टैंकरों पर रहेगी पैनी नजर
पेयजल सप्लाई को सुचारू रखने के लिए मुख्य सचिव ने कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए:
- विद्युत कनेक्शन नहीं कटेंगे: ऊर्जा विभाग को इस पूरे पेयजल प्लान में शामिल किया गया है। निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी नलजल योजना का बिजली कनेक्शन न काटा जाए।
- टैंकरों की मॉनिटरिंग: पानी के टैंकरों के दुरुपयोग और अनियमितता पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि टैंकर हर हाल में चिन्हित बसाहटों तक पहुंचे।
- समान जल वितरण: शहरी क्षेत्रों में पानी की टंकियों को भरने में समानता रखी जाएगी।
फंड की कोई कमी नहीं: ₹1500 करोड़ की राशि जारी
पेयजल प्रदाय में वित्तीय बाधा न आए, इसके लिए राज्य शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में नए बोरवेल खनन और जल स्रोतों के उत्खनन के लिए 1500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की है। इसके अतिरिक्त, पंचायतों को संधारण (रखरखाव) कार्यों के लिए 55 करोड़ रुपये की अलग से राशि दी गई है। नई एसओपी (SOP) के तहत अब पंचायतें जल संधारण के 10 हजार रुपये तक के कार्य स्वयं करा सकेंगी। इस कार्य के लिए 15वें व 16वें वित्त आयोग की राशि का भी उपयोग किया जा सकेगा।
गंगा दशहरा आयोजनों को पेयजल और जल संरक्षण से जोड़ें
बैठक में मौजूद अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि 25 और 26 मई को प्रदेश में दो दिवसीय ‘गंगा दशहरा’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उज्जैन के क्षिप्रा तट पर शामिल होंगे। उन्होंने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि इन सांस्कृतिक आयोजनों को पेयजल और जल संरक्षण की थीम से जोड़कर जनोपयोगी बनाया जाए।
बैठक में नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई सहित पंचायत, ग्रामीण विकास, ऊर्जा और सामान्य प्रशासन विभाग के आला अधिकारी उपस्थित रहे।










