दो शक्तिशाली नर बाघों का सफल रेस्क्यू और इलाज

कान्हा में दो शक्तिशाली नर बाघों टी-125 और टी-159 का सफल रेस्क्यू और इलाज

  • सोन और गायधर बीट में घायल बाघों को ट्रेंकुलाइज कर किया गया उपचार
  • खतरनाक सीडीवी वायरस की रिपोर्ट आई निगेटिव

मंडला महावीर न्यूज 29. कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन और वन्यजीव स्वास्थ्य विशेषज्ञों के दल ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो अलग-अलग परिक्षेत्रों में दो महत्वपूर्ण वन्यजीव स्वास्थ्य निगरानी एवं उपचार अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। वन विभाग और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत नर बाघ टी-125 और टी-159 का स्वास्थ्य परीक्षण, इलाज और गंभीर बीमारियों की जांच पूरी की। इलाज के बाद दोनों बाघों को सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास जंगल में छोड़ दिया गया है।

केस -1-  सरही परिक्षेत्र में बाघ टी-159 का हुआ इलाज 

पहला मामला सरही परिक्षेत्र के सोंफ बीट क्षेत्र का है। यहां फील्ड स्टाफ को लगभग 7-8 वर्षीय नर बाघ टी-159 के आगे के पैर में चोट, लंगड़ाहट और सुस्ती के संकेत मिले थे। कान्हा प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेषज्ञ दल को रवाना किया। सुरक्षित रूप से परीक्षण करने पर पाया गया कि बाघ के पंजे के नाखून में पुरानी चोट और सतही घाव था, जिसमें प्राकृतिक रूप से सुधार हो रहा था। टीम ने आवश्यक औषधियां और सपोर्टिव मेडिकेशन देकर बाघ को वापस जंगल में छोड़ दिया।

केस – 2- मुक्की परिक्षेत्र में बाघ टी-125 का हुआ रेस्क्यू 

दूसरा मामला मुक्की परिक्षेत्र अंतर्गत गायधर बीट सीएन 165 मिंकुर एनीकट का था। यहां स्टाफ ने करीब 8 वर्षीय नर बाघ टी-125 को सुस्त और लंगड़ाकर चलते हुए देखा था। विशेषज्ञ दल ने मौके पर पहुंचकर बाघ को सुरक्षित रूप से अचेत किया। प्रारंभिक जांच में बाघ का शारीरिक स्वास्थ्य संतोषजनक पाया गया। आवश्यक उपचार और निगरानी के बाद इस बाघ को भी सुरक्षित रूप से जंगल में वापस छोड़ दिया गया।

खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की हुई जांच 

दोनों ही मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय दल ने रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के माध्यम से वन्यजीवों के लिए बेहद घातक माने जाने वाले कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एवं अन्य संक्रमणों की तत्काल जांच की। राहत की बात यह है कि प्रारंभिक रिपोर्ट पूरी तरह निगेटिव आई है। विस्तृत और गहन परीक्षण के लिए बाघों के खून व अन्य जैविक नमूनों को एसडब्ल्यूएफएच प्रयोगशाला जबलपुर भेजा गया है।

इन विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ ऑपरेशन 

यह पूरी जटिल और संवेदनशील कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), मध्यप्रदेश द्वारा गठित विशेषज्ञ दल के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में संस्थाओं के विशेषज्ञ शामिल रहे। जिसमें स्कूल फॉर वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ जबलपुर, वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट भोपाल, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल और कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वन अधिकारी एवं रेस्क्यू दल मौजूद रहा।

वन्यजीव संरक्षण प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा 

कान्हा टाईगर रिर्जव प्रबंधन का कहना है कि वन्यजीवों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी, वैज्ञानिक परीक्षण एवं त्वरित उपचार हमारे वन्यजीव संरक्षण प्रबंधन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रकार की सतत निगरानी और त्वरित उपचारात्मक पहल से बाघों सहित अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के दीर्घकालिक संरक्षण को बल मिलता है।


Leave a Comment