कान्हा में बाघों की मौत और भ्रष्टाचार पर पत्रकारों का हल्लाबोल

कान्हा में बाघों की मौत और भ्रष्टाचार पर पत्रकारों का हल्लाबोल

बाघों की मौत और भ्रामक जानकारी पर एफआईआर की मांग

  • प्रधानमंत्री के नाम सौंपा 14 सूत्रीय ज्ञापन
  • बाघों की मौत और कथित अनियमितताओं को लेकर 5 मई से जारी है धरना
  • पार्क को मांसाहार मुक्त करने की उठी मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की लगातार हो रही मौतों, कथित भ्रष्टाचार और बढ़ती अव्यवस्थाओं ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। पिछले सात दिनों से कलेक्ट्रेट मार्ग पर धरना दे रहे जिलेभर के पत्रकारों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों का स्पष्ट आरोप है कि कान्हा प्रबंधन वन्यजीव संरक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहा है, जबकि धरातल पर स्थितियां चिंताजनक हैं।

ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया कि कान्हा में बाघों की मौत की घटनाओं को दबाया जाता है या भ्रामक जानकारी दी जाती है। पत्रकारों ने मांग की है कि वास्तविक स्थिति छिपाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। पत्रकारों का कहना है कि 5 मई से जारी इस धरने के बावजूद अब तक प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन नहीं दिया है, जिससे आक्रोश बढ़ रहा है।

पार्क के भीतर पक्के निर्माण और अतिक्रमण पर सवाल 

पत्रकारों ने पार्क के संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ते पक्के निर्माणों, होटल-रिसॉर्ट्स और अतिक्रमण पर कड़ी आपत्ति जताई है। ज्ञापन में बताया गया कि पार्क के तीनों प्रमुख द्वारों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां और अतिक्रमण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नष्ट कर रहे हैं। मांग की गई है कि इन अवैध निर्माणों को तत्काल हटाया जाए और पार्क को प्लास्टिक डिस्पोजल मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए।

पार्क की शांति भंग कर रहे डीजे और आतिशबाजी 

वन्यजीवों के असामान्य व्यवहार और बढ़ते तनाव का कारण रिसॉर्ट्स में होने वाले शोर-शराबे को बताया गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि पार्क के आसपास स्थित होटलों में डीजे, आतिशबाजी और शादी-विवाह जैसे शोर वाले आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। इसके साथ ही कान्हा को मांसाहार मुक्त क्षेत्र घोषित करने की भी मांग उठी है जिससे संरक्षण की मूल भावना बनी रहे।

बजट और मॉनिटरिंग की पारदर्शिता पर दिया जोर 

पत्रकारों ने पिछले 5 वर्षों के दौरान वन्यजीव सुरक्षा, तकनीकी उपकरणों की खरीद, चिकित्सा और प्रचार-प्रसार पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये के बजट की सार्वजनिक जानकारी मांगी है। पारदर्शिता लाने के लिए पत्रकारों ने एक 5 सदस्यीय स्वतंत्र मॉनिटरिंग टीम बनाने का सुझाव दिया है, जो हर माह पार्क का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे।

14 सूत्रीय प्रमुख मांगे 

प्रधानमंत्री के नाम मंडला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि पार्क के अंदर मवेशियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, सफारी वाहनों और पर्यटकों की संख्या गेट पर ही सार्वजनिक की जाए, पिछले 5 साल के निर्माण कार्यों जिसमें पुल-पुलिया, सड़क का ऑडिट सार्वजनिक किया जाए, इसके साथ ही पार्क के भीतर संचालित होटलों की वैधता की जांच के साथ अन्य मांगें प्रमुखता से पूरी की जाए। पत्रकारों के इस आंदोलन को अब जिले के विभिन्न सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। धरना स्थल पर मौजूद पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी 14 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई और निष्पक्ष जांच शुरू नहीं होती, उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा। ज्ञापन सौंपते समय जिले के सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


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