करोड़ों का खेल और कागजी विकास, हितग्राही परेशान

करोड़ों का खेल और कागजी विकास, हितग्राही परेशान

नारायणगंज में उद्योगिनी एनजीओ पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

  • बबलिया क्षेत्र में योजनाओं के नाम पर मचे बंदरबाँट की जांच की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत नारायणगंज के अंतर्गत ग्राम देवरी कला बबलिया में वर्ष 2007 से संचालित उद्योगिनी एनजीओ इन दिनों अपने कार्यों को लेकर विवादों के घेरे में है। स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं ने एनजीओ पर करोड़ों रुपये के गबन और फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासन की योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के गंभीर आरोप लगाए हैं।क्षेत्रीय दीदियों और ग्रामीणों का आरोप है कि सब्जी, फल-पौधे, मुर्गी पालन, बकरी पालन और सूअर पालन जैसी स्वरोजगार की तमाम योजनाएं धरातल पर शून्य हैं। चर्चा है कि अधिकारियों की मिलीभगत से हितग्राहियों के आधार कार्ड और आईडी लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते हैं और करोड़ों रुपये का व्यय कागजों पर दिखा दिया जाता है। मौके पर जांच करने पर पता चलता है कि न तो हितग्राही के पास बकरी का शेड बना है और न ही उसे पशु उपलब्ध कराए गए हैं।

सीमा विवाद और संसाधनों की हेराफेरी 

एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि नारायणगंज ब्लॉक के किसानों के लिए आने वाली मशीनरी, खाद और बीज जैसे उपकरण निवास ब्लॉक के व्यक्तियों के घर रखे जाते हैं। आरोप है कि लेखा-जोखा नारायणगंज के हितग्राहियों के नाम पर दिखाया जाता है, लेकिन उनका वास्तविक लाभ दूसरे ब्लॉक के लोग उठा रहे हैं। यहाँ तक कि नारायणगंज में गठित एक समिति को दी गई मशीनें भी अधिकारियों के करीबी व्यक्तियों के अधिकार क्षेत्र में सौंप दी गईं, जबकि वास्तविक समिति के सदस्य इससे अनभिज्ञ हैं।

जनप्रतिनिधियों से जांच की मांग 

ग्रामीणों ने बताया कि एनजीओ का कार्यालय अक्सर बंद रहता है और मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलता। स्थानीय युवाओं को आज तक यहाँ रोजगार नहीं मिला है। इस व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर बावलिया क्षेत्र में भारी जन-आक्रोश है। ग्रामीणों ने नारायणगंज जनपद अध्यक्ष आसाराम भारतीया और जिला प्रशासन से मांग की है कि ऑफिस के रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत की विधिवत जांच कराई जाए। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि फर्जी कृषकों के नाम पर आवंटित बीज और उद्योग असल में कहाँ गए हैं।



 

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