नैनपुर में भू-माफिया के हौसले बुलंद
150 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, विकास कार्य ठप
- वोट बैंक की राजनीति या प्रशासनिक अनदेखी
- करोड़ों की जनउपयोगी भूमि पर पक्ष-विपक्ष का मौन गठबंधन
मंडला महावीर न्यूज 29. अपनी सक्रियता और आंदोलनों के लिए पहचाना जाने वाला नैनपुर नगर इन दिनों एक गंभीर मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए है। नगर के वार्ड नंबर 7, इटका उमरिया और ग्राम गौझी पाइली क्षेत्र में लगभग 150 एकड़ शासकीय भूमि पर कुछ रसूखदारों द्वारा अवैध कब्जा कर कृषि कार्य किया जा रहा है। विडंबना यह है कि करोड़ों की यह जमीन नगर के विस्तार और जनहितकारी योजनाओं के लिए संजीवनी साबित हो सकती थी, लेकिन अतिक्रमणकारियों के आगे नियम-कानून बौने साबित हो रहे हैं।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि नगर विकास के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसी जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र, उपजेल, खेल मैदान और आवासहीनों के लिए योजनाएं प्रस्तावित हैं। भूमि उपलब्ध न होने के कारण नैनपुर का केंद्रीय विद्यालय, अस्पताल और बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य नगर से काफी दूर कराए जा रहे हैं। जबकि उक्त कब्जा क्षेत्र बाईपास मार्ग से लगा हुआ है, जो आवागमन के लिहाज से सर्वथा उपयुक्त है।
राजनीतिक संरक्षण और वोट बैंक का डर
सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कब्जे में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से जुड़े प्रभावशाली लोग शामिल हैं। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तो बहुत हैं, लेकिन कोई भी खुलकर सामने आने को तैयार नहीं है। आगामी नगर पालिका चुनावों को देखते हुए संभावित उम्मीदवार अपना वोट बैंक खराब होने के डर से इस गंभीर मुद्दे पर मौन हैं। राजनीतिक संरक्षण के चलते ही अब तक इस बेशकीमती जमीन को मुक्त नहीं कराया जा सका है।
नोटिस का खेल और गोलमोल जांच
राजस्व विभाग ने औपचारिकता निभाते हुए कब्जाधारियों को नोटिस तो थमा दिए हैं, लेकिन धरातल पर कार्रवाई शून्य है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित रहेगा या नैनपुर के भविष्य के लिए इस जमीन को मुक्त कराएगा।









