सूर्यकुण्ड धाम में गूंजी रामकथा

सूर्यकुण्ड धाम में गूंजी रामकथा

प्रभु श्रीराम ने किया राक्षसों का संहार

  • मिथिला में अटूट शिव धनुष तोड़ रचाया विवाह
  • नीलू महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही अमृतमयी कथा
  • गुरु भक्ति और धर्म रक्षा का दिया संदेश

मंडला महावीर न्यूज 29. नगर के समीप स्थित सुप्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सूर्यकुण्ड धाम में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। श्री सूर्यकुण्ड महाआरती एवं भंडारा समिति के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय भव्य श्रीराम कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। कथा व्यास पंडित नीलू महाराज द्वारा अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्री राम के आदर्शों का वर्णन किया जा रहा है।कथा में पंडित नीलू महाराज ने महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन और राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को मांगने के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ ने भारी मन से अपने पुत्रों को ऋषि के साथ भेजा। कथा के दौरान जब भगवान राम द्वारा ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का संहार कर ऋषि के यज्ञ को निर्विघ्न संपन्न कराने का प्रसंग आया, तो पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

अहिल्या उद्धार और सीता स्वयंवर 

कथा व्यास ने आगे बताया कि महर्षि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण मिथिला पहुंचे, जहां राजा जनक द्वारा माता सीता के स्वयंवर का आयोजन किया गया था। वहां उपस्थित बड़े-बड़े प्रतापी राजा जब शिव धनुष को हिला भी न सके, तब गुरु की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने सहज ही धनुष को उठाकर खंडित कर दिया। इसके पश्चात राम-सीता सहित चारों भाइयों का विवाह जनकपुर की कन्याओं के साथ संपन्न हुआ, जिससे अयोध्या और मिथिला में हर्ष का वातावरण छा गया।

आदर्श जीवन की प्रेरणा 

पंडित नीलू महाराज ने कहा कि रामायण का यह प्रसंग हमें गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा, धर्म की रक्षा और समाज में आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रीराम के गुणों को अपने जीवन में उतारें।

आज होगा समापन और भंडारा 

श्री सूर्यकुण्ड महाआरती एवं भंडारा समिति ने बताया कि 28 मार्च से शुरू हुई इस कथा का भव्य समापन आज 1 अप्रैल को होगा। समापन अवसर पर विशेष महाआरती एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति ने समस्त नगरवासियों से सपरिवार पहुंचकर महाप्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।



 

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