हर एक की जुबान पर नमामि देवी नर्मदे के स्वर
- व्यास नारायण मंदिर पहुंचे उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमावासी
- अभिषेक, पूजन, भंडारे के साथ हुआ उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा का समापन
मंडला महावीर न्यूज 29. नर्मदा नगरी मंडला में उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा विगत छह वर्ष पहले प्रारंभ की गई। जिसके अंतर्गत महिष्मति मां नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा आयोजन समिति के तत्वावधान में उत्तर वाहिनी नर्मदा परिक्रमा 28 मार्च को शुरू की गई, जिसका समापन 29 मार्च रविवार को व्यास नारायण मंदिर में पूजन अर्चन के साथ किया गया। बताया गया कि मंडला नगर के व्यास नारायण मंदिर में संकल्प लेकर उत्तर वाहिनी नर्मदा परिक्रमा शुरू हुई। परिक्रमा का रात्रि विश्राम घाघा घाघी में हुआ। यहां राँित्र में भजन, कीर्तन किया गया। माँ नर्मदा की मनमोहक आरती भक्तों द्वारा की गई। हजारों की संख्या में यहां परिक्रमावासी के अलावा अन्य लोग मौजूद रहे।
जानकारी अनुसार दो दिवसीय उत्तर वाहिनी नर्मदा परिक्रमा के घाघा घाघी में रात्रि विश्राम के बाद प्रात: घाघा घाघी नर्मदा तट नाव से पार करके बबैहा गरम पानी कुण्ड पहुंचे। यहां गरम पानी कुण्ड में परिक्रमा में शामिल भक्तों ने गरम पानी कुण्ड व नर्मदा में स्नान कर यात्रा को आगे बढ़ाया। बबैहा में अल्प विराम के बाद यात्रा आगे की और बढ़ी। वहीं यहां से कुछ परिक्रमावासी ग्वारी, तिंदनी होते हुए कटरा होते व्यास नारायणगंज मंदिर में अपनी परिक्रमा पूरी की।
वहीं कुछ परिक्रमावासी तिंदनी से एमपीटी के आगे गाजीपुर होते हुए जिलहरी घाट के गुरूकुल में कुछ देर विश्राम किया। जहां से माँ नर्मदा नदी के किनारे-किनारे नए पथ मार्ग से सहस्त्रधारा पहुंचे। जहां से गौंझी, देवदरा, नेहरू स्मारक होते हुए जेलघाट, नाव घाट, बुधवारी चौक से किले घाट स्थित व्यास नारायण मंदिर में दो दिवसीय उत्तरवाहिनी माँ नर्मदा परिक्रमा का समापन किया। बताया गया कि परिक्रमा पथ मार्ग में श्रृद्धालुओं द्वारा परिक्रमा कर रहे भक्तो ंके लिए बबैहा से लेकर कटरा के बीच जगह-जगह स्वल्पाहार, पेयजल एवं चाय नाश्ता की व्यवस्था की गई। इस दौरान नर्मदा भक्तों की सेवा का अवसर क्षेत्रीय लोगों को मिला।

पांव में आए छाले, फिर भी रहा उत्साह
बताया गया कि दो दिवसीय नर्मदा परिक्रमा में जिले समेत अन्य जिलों और राज्यों के नर्मदा भक्त परिक्रमा में शामिल हुए। जिसमें मुम्बई, केरल, नासिक, नागपुर समेत महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा नर्मदा भक्त उत्तरवाहिनी परिक्रमा में पहुंचे। इन्हीं में एक नर्मदा भक्त दूसरे चरण की उत्तरवाहिनी माँ नर्मदा परिक्रमा में नंगे पैर परिक्रमा करने पहुंचे। पहले दिन की परिक्रमा के दौरान ही उनके पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन नर्मदा भक्त का उत्साह कम नहीं हुआ। अपने पैरों में कपड़े की पट्टी बांधकर माँ नर्मदा के प्रति अपनी श्रृद्धा व्यक्त करते हुए अपने परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ते चले और दो दिवसीय माँ नर्मदा की परिक्रमा पूर्ण की।

करीब 45 किमी की रही यात्रा
बताया गया कि उत्तरवाहिनी माँ नर्मदा परिक्रमा का यह छटवां वर्ष है। महाराजपुर संगम से घाघा-घाघी तक लगभग 21 किमी एक तट व दूसरे तट बैबहा से राजराजेश्वरी वार्ड तक करीब 45 किमी की परिक्रमा पूर्ण की गई। लालाराम चक्रवती ने बताया कि माँ नर्मदा परिक्रमा को लेकर शास्त्रों में एक प्रावधान यह भी है कि जो कोई भी मां नर्मदा की पूरी परिक्रमा किसी कारणवश चाहते हुए भी न कर पा रहा हो तो वह व्यक्ति उत्तरवाहिनी मां नर्मदा परिक्रमा कर इस पुण्य लाभ को प्राप्त कर सकता है। यह जिलेवासियों का सौभाग्य है कि मां नर्मदा जिले को तीन ओर से घेरते हुए मंडला से कल-कल करती आगे बढ़ रही है। इसी के साथ जिले में उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा तट भी स्थित है। जिससे नर्मदा नगरी का महत्व और बढ़ जाता है।
सम्पूर्ण नर्मदा परिक्रमा के बराबर पुण्यदायक
अमरकंटक से मां नर्मदा का उद्गम होता है और खंबात की खाड़ी तक मां नर्मदा प्रवाहित होती है, इस पूरे मार्ग में तीन स्थान ऐसे हैं जहां मां रेवा उत्तर दिशा में प्रवाहित हुई हैं। जहां-जहां मां नर्मदा उत्तर दिशा में प्रवाहित हुई उतने क्षेत्र की परिक्रमा करने का प्रावधान शास्त्रों में बताया गया है और यह परिक्रमा वर्ष में सिर्फ एक माह में ही की जाती है, वह चैत्र का माह। पूरे नर्मदा क्षेत्र में 3 स्थान ऐसे हैं जहां माँ नर्मदा उत्तरवाहिनी हुई हैं, इनमें से एक गुजरात प्रदेश में तिलकवाड़ा, दूसरा क्षेत्र मंडला और तीसरा ओमकारेश्वर के पास का स्थान है जो कि अब बांध बन जाने से डूब क्षेत्र में आकर विलोपित हो गया है। गुजरात के तिलकवाड़ा में उत्तरवाहिनी परिक्रमा वर्षो से की जा रही है। यह आयोजन उस क्षेत्र का बहुत बड़ा आयोजन होता है। दो दिवसीय यात्रा में शामिल नर्मदा भक्तों का जगह-जगह स्वागत भी किया गया।










