नर्मदा नगरी में आस्था का संगम
हजारों श्रद्धालुओं ने शुरू की उत्तरवाहिनी परिक्रमा
- व्यास नारायण मंदिर में संकल्प के साथ यात्रा का आगाज
- तिलवाड़ा और ओंकारेश्वर जैसा पुण्यदायी है मंडला का यह तट
- नर्मदा के किनारे किनारे बढ़ी यात्रा
- आज होगा उत्तरवाहिनी परिक्रमा का समापन
मंडला महावीर न्यूज 29. महिष्मति मां नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा आयोजन समिति के तत्वावधान में शनिवार प्रात: मंडला नगर के ऐतिहासिक व्यास नारायण मंदिर से दो दिवसीय उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान में जिले के समीपवर्ती क्षेत्रों सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने विधिवत संकल्प लेकर पदयात्रा प्रारंभ की।
यात्रा की शुरुआत किलाघाट से हुई, जहां श्रद्धालुओं ने नाव द्वारा मां नर्मदा को पार कर पुरवा (मां सरस्वती प्रस्त्रवण तीर्थ) के दक्षिण तट पर दस्तक दी। यहां श्रीकृष्ण मंदिर में पूजन के पश्चात नर्मदा-बंजर संगम स्थल पर बने कच्चे पुल को पार करते हुए महाराजपुर संगम से घाघी की ओर पदयात्रा आगे बढ़ी। श्रद्धालुओं ने दादा धनीराम जी की समाधि के दर्शन किए और राधाराज आश्रम होते हुए मानादेई ग्राम पहुंचे। सूर्य की तपिश के बावजूद नर्मदा स्तुति और जयकारों के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना।

धार्मिक महत्व और उत्तरवाहिनी का रहस्य
आयोजन समिति के अनुसार, मां नर्मदा का प्रवाह अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक मुख्यत: पूर्व से पश्चिम की ओर है, लेकिन पूरे मार्ग में केवल तीन स्थान गुजरात के तिलकवाड़ा, मंडला और ओंकारेश्वर में नर्मदा उत्तरवाहिनी (उत्तर दिशा की ओर बहने वाली) होती हैं। मंडला में नर्मदा का करीब 21 किमी का यह प्रवाह विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि चैत्र मास में की गई यह परिक्रमा संपूर्ण नर्मदा परिक्रमा के समान पुण्य प्रदान करती है।

आज होगा समापन
परिक्रमावासियों का रात्रि विश्राम घाघी तट पर सुनिश्चित किया गया, जहां भोजन और ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई। रविवार सुबह पुन: यात्रा प्रारंभ होकर विभिन्न तटों से गुजरते हुए शाम को व्यास नारायण मंदिर पहुंचेगी, जहां प्रसादी वितरण के साथ इस दो दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा का विधि-विधान से समापन होगा।










