चुटका परमाणु परियोजना
ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण लगातार दूसरे दिन रुका वन भूमि का सर्वे
- बिना ग्राम सभा की सहमति के सर्वे का आरोप
- पेसा और वन अधिकार कानून के उल्लंघन पर भड़के ग्रामीण
मंडला महावीर न्यूज 29. चुटका परमाणु परियोजना के लिए आरक्षित एवं राजस्व वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया है। 18 मार्च को एक बार फिर भारी पुलिस बल के साथ सर्वे करने पहुँचे राजस्व, वन विभाग और एनपीसीआईएल के अमले को ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके चलते टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा।
जानकारी अनुसार 16 मार्च को भी सर्वे का प्रयास किया गया था, जिसे ग्रामीणों ने रोक दिया था। इसके बाद 18 मार्च को जब टीम दोबारा पहुँची, तो चुटका, कुंडा और टाटीघाट के सैकड़ों महिला-पुरुष पहले से ही जंगल में मोर्चा संभाले हुए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन बिना ग्राम सभा की अनुमति के सर्वे कर रहा है, जो पेसा कानून का सीधा उल्लंघन है। आक्रोश को देखते हुए अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि अब गांव में बैठक और चर्चा के बाद ही आगामी कार्यवाही की जाएगी।
हक और अधिकारों की लड़ाई
चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादू लाल कुडापे ने बताया कि राज्य सरकार ने 2017 में ही 54.46 हेक्टेयर आरक्षित वन और 65 हेक्टेयर राजस्व वन को परियोजना के लिए परिवर्तित करने की मंजूरी दे दी है, लेकिन इसमें प्रभावित ग्राम सभाओं की सहमति नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून 2006 के तहत अभी तक व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों का निराकरण नहीं हुआ है। चुटका और कुंडा गांव के दर्जनों काश्तकार वर्षों से इन जमीनों पर खेती कर जीवनयापन कर रहे हैं, जिन्हें अभी तक पट्टे (वन अधिकार पत्र) नहीं मिले हैं।
प्रमुख जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
विरोध प्रदर्शन के दौरान जिला पंचायत सदस्य भूपेंद्र बरकड़े सहित चुटका, कुंडा और टाटीघाट के अनेक ग्रामीण नेता और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। मीरा बाई मरावी, सोना बाई और सरिता बाई सहित अन्य महिलाओं ने अपनी जमीन और जंगल बचाने के लिए दृढ़ संकल्प जताया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि बिना कानूनी प्रक्रिया और सहमति के कोई भी सर्वे स्वीकार नहीं किया जाएगा।










