3500 किलोमीटर की दुर्गम यात्रा पर निकले संत धर्मपुरी महाराज

कठिन तपस्या: हाथों के बल नर्मदा परिक्रमा कर रहे संत धर्मपुरी महाराज का रामनगर में भव्य स्वागत

  • 3500 किलोमीटर की दुर्गम यात्रा पर निकले संत
  • 11 दिसंबर को अमरकंटक से शुरू की थी अनूठी साधना

मंडला महावीर न्यूज 29.  नर्मदा परिक्रमा के इतिहास में एक अत्यंत कठिन और अनूठी साधना देखने को मिल रही है। निरंजनी अखाड़े के संत धर्मपुरी महाराज, जो इन दिनों हाथों के बल अधोमुखी होकर माँ नर्मदा की परिक्रमा कर रहे हैं, मंगलवार को रामनगर पहुँचे। उनके आगमन पर स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने ‘नर्मदे हर’ के जयकारों के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

भक्तों ने की पुष्पवर्षा

रामनगर पहुँचने पर भक्तों ने संत धर्मपुरी महाराज का पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया और विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण भावुक और प्रेरणादायक था। संत महाराज रामनगर में विश्राम के पश्चात आगे मधुपुरी की ओर रवाना हो गए।

अमरकंटक से शुरू हुई है कठिन साधना

डिंडौरी जिले के करंजिया निवासी संत धर्मपुरी महाराज ने 11 दिसंबर को अमरकंटक स्थित माँ नर्मदा के उद्गम स्थल से अपनी परिक्रमा प्रारंभ की थी। लगभग 3500 किलोमीटर लंबी इस परिक्रमा की विशेषता यह है कि वे प्रतिदिन हाथों के बल अधोमुखी होकर तीन से चार किलोमीटर की यात्रा करते हैं। वे मात्र सात वर्ष की आयु से ही साधु-संतों के सान्निध्य में हैं। यद्यपि यह उनकी चौथी नर्मदा परिक्रमा है, किंतु पहली बार वे इतनी कठिन तपस्या कर रहे हैं।

दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़

संत की इस कठोर साधना को देखने और उनके दर्शन लाभ लेने के लिए मार्ग के सभी गाँवों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। जहाँ-जहाँ से संत गुजरते हैं, लोग उनका स्वागत कर अपनी श्रद्धा निवेदित कर रहे हैं। फिलहाल संत का रात्रि विश्राम रामनगर और मधुपुरी के मध्य निर्धारित है।



रिपोर्टर- गर्जेन्द्र पटेल, अंजनिया, मंडला ✍️

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