सिंधी समाज की महिलाओं ने विधि-विधान से किया होलिका माता का पूजन, सुख-समृद्धि की मांगी दुआ
- बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
- सिंधी परंपरा के अनुसार ‘मीठी रोटी और धागे’ से हुई होलिका पूजा
मंडला महावीर न्यूज 29 | रंगों के महापर्व होली के अवसर पर सिंधी समाज द्वारा अपनी गौरवशाली परंपराओं का निर्वहन पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। धुरेड़ी पर्व के पूर्व, समाज की महिलाओं ने सामूहिक रूप से एकत्रित होकर होलिका माता का पूजन किया। इस दौरान पारंपरिक भजनों और भक्तिमय वातावरण के बीच परिवार की खुशहाली की कामना की गई।
प्रतीकात्मक पूजन: ‘मीठी रोटी’ और ‘धागे’ का महत्व
इस पूजन की सबसे अनूठी विशेषता ‘मीठी रोटी और सूत का धागा’ रही। सामाजिक मान्यताओं के अनुसार:
- मीठी रोटी: इसे होलिका का प्रतीक माना जाता है।
- सूत का धागा: इसे भक्त प्रहलाद का प्रतीक मानकर रोटी पर लपेटा जाता है।
- अग्नि संस्कार: पूजन के दौरान जब मीठी रोटी को प्रतीकात्मक रूप से अग्नि दी जाती है, तो रोटी जल जाती है लेकिन धागा सुरक्षित बच जाता है। यह दृश्य ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ के शाश्वत संदेश को जीवंत करता है।
पारंपरिक व्यंजनों का भोग
होलिका माता को समाज के पारंपरिक व्यंजनों का नैवेद्य अर्पित किया गया। भोग में मुख्य रूप से सिंधी गीयर (विशेष जलेबी), मीठी रोटी, गुलाब जामुन, भजिया और रेवड़ी शामिल रहे। महिलाओं ने बताया कि इस पूजन सामग्री को परंपरा अनुसार तीसरे दिन ‘ठंडा’ किया जाता है।
व्रत और पल्लव पूजा
इस विशेष अवसर पर महिलाओं ने दिन भर उपवास रखा। सामूहिक रूप से ‘पल्लव पूजा’ अर्चना कर समाज और राष्ट्र की उन्नति की प्रार्थना की गई। पूजन संपन्न होने के पश्चात ही महिलाओं ने प्रसादी ग्रहण कर अपना व्रत खोला। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर और गले मिलकर होली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।
मुख्य अंश:
“मीठी रोटी का जलना और धागे का सुरक्षित रहना यह दर्शाता है कि अटूट विश्वास और भक्ति के सामने बड़ी से बड़ी आसुरी शक्तियां भी परास्त हो जाती हैं।”











