होली पर ग्रहण का साया: 3 मार्च को सूर्योदय से पूर्व होगा होलिका दहन
- 4 मार्च को मनेगी धुलेंडी
- भद्रा और सूतक के बीच निकला होलिका दहन का 50 मिनट का मुहूर्त
- ज्योतिषाचार्य ने दी सावधानी की सलाह
मंडला महावीर न्यूज 29. रंगों का महापर्व होली इस वर्ष ज्योतिषीय गणनाओं के कारण विशेष परिस्थितियों में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी के अनुसार, भद्राकाल और चंद्र ग्रहण की उपस्थिति के कारण इस बार होलिका दहन का समय अत्यंत सीमित और विशिष्ट होगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा और सूतक काल में दहन वर्जित होने के कारण 3 मार्च, मंगलवार को प्रातः 5:29 बजे से 6:19 बजे तक (मात्र 50 मिनट) ही दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।
क्यों बदला समय? (भद्रा और ग्रहण का संयोग)
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से शुरू होगी, लेकिन उसी समय ‘अशुभ भद्रा’ लगने के कारण 2 मार्च की रात को दहन नहीं किया जा सकेगा। वहीं, 3 मार्च को दोपहर में चंद्र ग्रहण लग रहा है, जिसका सूतक सुबह 6:20 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। अतः भद्रा और सूतक के बीच के समय (सूर्योदय से पूर्व) को ही दहन के लिए शास्त्र सम्मत माना गया है।
सूतक काल और ग्रहण की सावधानियां
- मुहूर्त: 3 मार्च की सुबह 6:20 बजे से सूतक लग जाएगा, जो ग्रहण समाप्ति (शाम 6:47 बजे) तक रहेगा।
- परहेज: सूतक काल में मूर्ति स्पर्श और भोजन ग्रहण करने से बचना चाहिए। खाद्य सामग्री की शुद्धता के लिए उनमें तुलसी दल या कुशा डालें।
- शुभ फल: ग्रहण के दौरान मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी होता है। समाप्ति के बाद स्नान, दान और नर्मदा जल से शुद्धिकरण करना चाहिए।
सिंह राशि और नक्षत्र पर प्रभाव
यह ग्रहण सिंह राशि एवं पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है। इसके प्रभाव से सिंह राशि के जातकों को मानसिक अस्थिरता या क्रोध का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषीय सलाह है कि इस राशि के लोग स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
पूजन सामग्री और धुलेंडी
धुलेंडी या रंगों वाली होली 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी। होलिका पूजन के लिए नारियल, पान, सुपारी, अक्षत, धूप-दीप के साथ गेहूं की बालियां और चना अर्पित करना सुख-समृद्धि के लिए शुभ बताया गया है।
रिपोर्टर- गर्जेन्द्र पटेल, अंजनिया, मंडला ✍️











