धर्मपुरी महाराज-अद्भुत आस्था, संकल्प की पराकाष्ठा

हाथों के बल 3500 किमी की नर्मदा परिक्रमा पर निकले धर्मपुरी महाराज

धर्मपुरी महाराज-अद्भुत आस्था-संकल्प की पराकाष्ठा

  • देवगांव में हुआ भव्य स्वागत
  • अमरकंटक से शुरू हुई अधोमुखी यात्रा पहुंची मंडला की ओर
  • दर्शन के लिए उमड़ रही भक्तों की भारी भीड़

मंडला महावीर न्यूज 29.  मां नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा और कठिन तपस्या का एक अनूठा उदाहरण इन दिनों मंडला जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। डिंडौरी जिले के करंजिया निवासी धर्मपुरी महाराज अपनी असाधारण ‘अधोमुखी’ (हाथों के बल) नर्मदा परिक्रमा यात्रा के साथ मोहगांव क्षेत्र की सीमा पार कर देवगांव में प्रवेश कर चुके हैं।

अमरकंटक से शुरू हुआ कठिन सफर

धर्मपुरी महाराज ने अपनी यह 3500 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा बीते 11 दिसंबर को मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से प्रारंभ की थी। विशेष बात यह है कि वे यह पूरी यात्रा सामान्य रूप से चलकर नहीं, बल्कि अपने हाथों के बल पर कर रहे हैं। 12 फरवरी से जिले की सीमा में भ्रमण कर रहे महाराज प्रतिदिन लगभग 3 से 4 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं और रात्रि विश्राम किसी शिवालय या मंदिर में होता है।

भक्ति और जयघोष से गूंजा क्षेत्र

सोमवार को जैसे ही यात्रा देवगांव पहुंची, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उन पर फूल-मालाओं की वर्षा कर गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरा क्षेत्र ‘नर्मदे हर’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। 10 दिनों तक मोहगांव ब्लॉक के आंडियामाल क्षेत्र में प्रवास के बाद अब यह यात्रा तेजी से मंडला मुख्यालय की ओर बढ़ रही है। मंगलवार को देवगांव में विश्राम के पश्चात यात्रा आगे के पड़ाव के लिए प्रस्थान करेगी।

साधना और संकल्प की मिसाल

धर्मपुरी महाराज की यह चौथी नर्मदा परिक्रमा है। बताया जाता है कि वे मात्र 7 वर्ष की आयु से ही साधु-संतों के सानिध्य में रह रहे हैं। उनकी यह कठिन साधना न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि मानव संकल्प और आत्मबल की एक जीवंत मिसाल बन गई है। उनकी एक झलक पाने और आशीर्वाद लेने के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।



रिपोर्टर- गर्जेन्द्र पटेल, अंजनिया, मंडला ✍️


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