नर्मदा तट पर शिव आराधना का भव्य शंखनाद

नर्मदा तट पर शिव आराधना का भव्य शंखनाद

  • गूंजा हर-हर महादेव का जयघोष
  • कथा के प्रथम दिन स्वामी यशवीर जी ने सुनाया ऋषि मार्कण्डेय का प्रसंग
  • शवत्व से शिवत्व की ओर बढऩे का दिया संदेश

मंडला महावीर न्यूज 29. नर्मदा के पावन तट पर स्थित नर्मदा कॉलोनी पार्क में मंगलवार से अध्यात्म और श्रद्धा का अनूठा संगम भगवान शिव आराधना महोत्सव के रूप में शुरू हुआ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित इस पाँच दिवसीय महोत्सव के पहले दिन पूरा वातावरण शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और संगीत की मधुर लहरियों के बीच प्रज्वलित दीपों ने आयोजन स्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। महोत्सव के आरंभ में भक्तों द्वारा लगाए गए हर-हर महादेव के जयघोष से संपूर्ण क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।

ऋषि मार्कण्डेय की कथा का मार्मिक वर्णन 

कथाव्यास स्वामी यशवीर ने महोत्सव के प्रथम दिन ऋषि मार्कण्डेय के अलौकिक जन्म की कथा का सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ऋषि मृकण्डु और उनकी पत्नी सुतपा की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पुत्र का वरदान दिया था। स्वामी जी ने कथा के मर्म को समझाते हुए कहा कि ऋषि ने दीर्घायु मन्दबुद्धि पुत्र के स्थान पर 16 वर्ष की अल्पायु वाले अत्यंत विद्वान पुत्र को चुना। यह प्रसंग सिखाता है कि जीवन की सार्थकता उसकी लंबाई में नहीं, बल्कि कर्मों की गहराई में है। मानव जीवन का असली उद्देश्य शवत्व से शिवत्व की प्राप्ति है।

चेतना जागृत करने का आह्वान 

कथा के दौरान श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए बताया गया कि शरीर नश्वर है, अत: मनुष्य का परम लक्ष्य अपने भीतर स्थित शाश्वत शिव यानी अपनी चेतना को जागृत करना होना चाहिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने भक्ति संगीत और आध्यात्मिक विचारों का लाभ लिया।


 


 

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