दस्तावेजों में ‘अ’ हटाकर अस्वीकृत ऋण को बनाया स्वीकृत
- साजिश की कहानी-एक अक्षर हटाकर बदल दी ऋण की स्थिति
- जिला सहकारी बैंक मंडला में 65 लाख की धोखाधड़ी का खुलासा
- तत्कालीन महाप्रबंधक सहित चार पर केस दर्ज
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के सहकारिता क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित मंडला एवं अल्प बचत साख सहकारी समिति में हुए 65 लाख रुपये के ऋण घोटाले में ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन महाप्रबंधक सहित चार पदाधिकारियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया है।
जानकारी अनुसार ईओडब्ल्यू की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि भ्रष्टाचार के लिए दस्तावेजों के साथ किस हद तक छेड़छाड़ की गई। विगत 8 नवंबर 2011 को जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मंडला की ऋण उप समिति की बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में अल्प बचत साख सहकारी समिति पर 38 लाख रुपये का पुराना बकाया होने के कारण उसके नए ऋण आवेदन को अस्वीकृत कर दिया गया था। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए बैठक के दस्तावेजों में कूटरचना की और अस्वीकृत शब्द से अ अक्षर को मिटा दिया, जिससे वह स्वीकृत पढऩे में आने लगा। इसके साथ ही अंतिम पंक्ति में चालाकी से अतिरिक्त शब्द जोड़कर 65 लाख रुपये की अल्प अकृषि ऋण साख सीमा को स्वीकृत दर्शा दिया गया।
पद का किया दुरुपयोग
इस पूरे घटनाक्रम में तत्कालीन महाप्रबंधक नरेन्द्र कोरी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। बैठक के मात्र तीन दिन बाद ही 12 नवंबर 2011 को कोरी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कृषि शाखा मंडला को आदेश जारी कर दिया। आदेश में 65 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत बताते हुए राशि सदस्यों में वितरित करा दी गई। जांच एजेंसी के अनुसार यह बैंक को प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक हानि पहुंचाने और कूटरचना का गंभीर मामला है। इसके साथ ही वर्तमान प्रबंधक शशि चौधरी के कार्यकाल में भी नियमों की अनदेखी सामने आई है। समिति की उपविधि के विपरीत गैर-सदस्यों से 26,68,436 रुपये की राशि अवैधानिक रूप से प्राप्त की गई, जो धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
इन पर दर्ज हुआ आपराधिक प्रकरण
ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद चार लोगों को आरोपी बनाया है। जिसमें तत्कालीन महाप्रबंधक नरेन्द्र कोरी, तत्कालीन स्थापना प्रभारी एनएल यादव, तत्कालीन लेखापाल व पंजी फील्ड कक्ष प्रभारी अतुल दुबे और प्रबंधक, अल्प बचत साख सहकारी समिति मंडला शशि चौधरी शामिल है। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7(सी) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।











