डीएफओ पर आर्थिक शोषण और अनुचित दबाव के आरोप
- अधिकारियों-कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, डीएफओ पर तानाशाही के आरोप
- एक हफ्ते में हटाओ वरना करेंगे हड़ताल
- उत्पादन वनमंडलाधिकारी की कार्यशैली से नाराज स्टाफ ने दी सामूहिक कार्य बहिष्कार की चेतावनी
मंडला महावीर न्यूज 29. उत्पादन वनमंडल मंडला में प्रशासनिक खींचतान और असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। वनमंडल के समस्त अधिकारियों और क्षेत्रीय कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपने ही वरिष्ठ अधिकारी (उत्पादन वनमंडलाधिकारी) के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को एक विस्तृत और सामूहिक हस्ताक्षरित शिकायत पत्र भेजा गया है, जिसमें अधिकारी पर दुर्व्यवहार, प्रशासनिक विसंगतियों और कर्मचारियों के मानसिक उत्पीडऩ के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि वित्तीय स्वीकृति से जुड़े मामलों में जानबूझकर देरी की जाती है, जिससे कार्य पूर्ण होने के बावजूद भुगतान लंबित रहता है। नीलामी और कार्यशालाओं जैसे सरकारी कार्यों का खर्च भी कर्मचारियों को अपनी जेब से भरना पड़ रहा है। इसके साथ ही, कूपों में कटाई, लॉगिंग और थपीकरण को लेकर जमीनी अमले पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से हतोत्साहित हैं।
व्यवहार और समन्वय का अभाव
कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि बैठकों और दौरों के दौरान उनके साथ और यहाँ तक कि श्रमिकों के साथ भी अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। एरियर, टीए और डीए जैसे बुनियादी हकों का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। अवकाश मांगने पर मना करना और निर्धारित समय से अधिक कार्य कराना अब आम बात हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर कारण बताओ नोटिस (स्पष्टीकरण) जारी कर उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम-सामूहिक हड़ताल की चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण एक सप्ताह के भीतर किया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा में इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो उत्पादन वनमंडल के समस्त क्षेत्रीय कर्मचारी विवश होकर कार्य बहिष्कार और सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में होने वाली किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय क्षति की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।










