जल संकट-मिशन के नाम पर करोड़ों खर्च, आदिवासी गांव आज भी प्यासे और बीमार

मंडला में जल जीवन मिशन फेल

  • 8 किलोमीटर दूर मानिकपुर गांव दूषित पानी पीने को मजबूर
  • महिलाएं 2 किलोमीटर पैदल चलने को विवश, दूषित झिरिया का पानी बनी मजबूरी
  • दूषित पानी बना मौत का कारण, रमतीला की त्रासदी के बाद भी प्रशासन मौन, पीएचई अधिकारी ने नहीं उठाया फोन
  • पानी का संकट-मिशन के नाम पर करोड़ों खर्च, आदिवासी गांव आज भी प्यासे और बीमार

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले में जल जीवन मिशन के तहत किए गए बड़े-बड़े दावे मवई विकासखंड के धनगांव ग्राम पंचायत अंतर्गत मानिकपुर गांव में खोखले साबित हो रहे हैं। मवई मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित यह आदिवासी बाहुल्य गांव आज भी शुद्ध पेयजल से वंचित है। दूषित पानी पीने की मजबूरी और प्रशासनिक बेपरवाही ने इस क्षेत्र के ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

जानकारी अनुसार मानिकपुर गांव के निवासी खासकर महिलाएं सालों से हर दिन सुबह-सुबह करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर एक झिरिया से पानी लाने को मजबूर हैं। यह झिरिया अक्सर गंदा और दूषित पानी देती है, जिसे कपड़े से छानकर पीना ग्रामीणों की नियति बन गई है। गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत पूरा गांव इसी दूषित पानी पर निर्भर है, जिसके कारण बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।

मिशन-धरातल पर नाकाम, फाइलों में सफल 

जल जीवन मिशन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। गांव में पाइप लाइन बिछाई गई और टंकियों का निर्माण भी हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत निराशा जनक है। ग्रामीणों ने बताया कि टंकियों में पानी का भराव नहीं होता। नल-जल योजना के लिए बिजली की आपूर्ति नहीं है। पंचायत के पास नल-जल योजना के संचालन के लिए कोई तकनीकी कर्मचारी मौजूद नहीं है। जिसके कारण गांव में लगे नल पूरी तरह सूखे हैं और सरकारी योजना केवल ठेकेदारों की कमाई और विभागीय फाइलों में ही सफल दिखाई दे रही है।

नहीं टूटी प्रशासन की नींद, जवाबदेही पर गंभीर सवाल 

बताया गया कि हाल ही में पड़ोसी रमतीला गांव में दूषित पानी पीने के कारण कई बच्चे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे और एक महिला की दुखद मृत्यु हो गई थी। इस त्रासदी को प्रमुखता से समाचारों में दिखाए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से ना तो कोई जांच हुई और ना ही प्रभावित परिवारों तक कोई राहत पहुंची। प्रशासन की संवेदनहीनता की हद तब हो गई जब इस गंभीर विषय पर पीएचई विभाग के सब इंजीनियर से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना भी उचित नहीं समझा। यह रवैया प्रशासनिक कार्यशैली और जन समस्याओं के प्रति उनकी उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जल आंदोलन की चेतावनी 

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मवई अध्यक्ष संतोष रानू हरदहा ने अपने सहयोगियों के साथ मानिकपुर गांव का दौरा किया। उन्होंने महिलाओं की पीड़ा को प्रत्यक्ष रूप से सुनने के बाद जिला कलेक्टर और पीएचई विभाग को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस पार्टी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए मांग की है कि ऐसे दूषित जल संकट वाले सभी गांवों का तत्काल सर्वे कराकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शुद्ध जल आपूर्ति की जाए। यदि सरकार इस विषय पर गंभीरता से ध्यान नहीं देती है, तो कांग्रेस ग्रामीणों के साथ मिलकर पूरे जिले में व्यापक जल आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी। यह आंदोलन अब केवल पानी का नहीं, बल्कि जन अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही का होगा।



 

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