पश्चिमी भारत में सर्वश्रेष्ठ मोबाइल रिकवरी के लिए मंडला पुलिस सम्मानित
- 74 प्रतिशत मोबाईल रिकवरी के साथ वेस्ट जोन में प्रथम रहा मंडला
- करोड़ों के मोबाइल मालिकों को वापस मिले
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल का उपयोग करते हुए मोबाइल रिकवरी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा गोवा में आयोजित पश्चिम क्षेत्र सुरक्षा सम्मेलन में मंडला पुलिस को 74 प्रतिशत मोबाइल रिकवरी दर के साथ पूरे वेस्ट जोन में पहला स्थान प्राप्त करने के लिए सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि ने आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला को गौरवांवित किया है।
जानकारी अनुसार मंडला पुलिस ने पिछले डेढ़ साल में सीईआईआर पोर्टल का इस्तेमाल करते हुए 2 हजार 31 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी कुल कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये थी। इन मोबाईल में से 1046 मोबाइल 2024 में और 985 मोबाइल 2025 में रिकवर किए गए। इस उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक ने जनवरी में मंडला पुलिस की टीम को 50 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके साथ ही इस कार्य में लगे दो पुलिसकर्मियों को डीजी डिस्क और रोल के सम्मान से भी नवाजा गया।
पांच-स्तरीय कार्यप्रणाली से मिली सफलता
मंडला पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने सम्मेलन में इस सफलता के पीछे की पंच-स्तरीय कार्यप्रणाली को साझा किया। जिसमें उन्होंने बताया कि प्रत्येक थाने में एक उप-निरीक्षक और दो आरक्षकों को प्रशिक्षण देकर पोर्टल संचालन के लिए थाना साइबर डेस्क का गठन किया गया, जिससे शिकायतों और ट्रेसिंग की प्रक्रिया आसान हो गई। राष्ट्रीय साइबर रिपोर्टिंग हेल्पलाइन 1930, सीईआईआर पोर्टल और स्थानीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 7587644088 का प्रचार स्टैंडी, फ्लेक्स बैनर, और सोशल मीडिया के माध्यम से किया गया। गुमशुदा मोबाइल की शिकायतें थाने में ही तुरंत दर्ज की गईं। खरीद बिल या आईएमईआई नंबर न होने पर भी शिकायतें स्वीकार की गईं, जिससे आम जनता को काफी राहत मिली। जिला स्तर पर एक टीम बनाई गई जो शिकायतों की प्रगति की निगरानी करती थी। मासिक क्राइम मीटिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों और उनकी टीमों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। तकनीकी टीम और फील्ड स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय से अलग-अलग राज्यों और जिलों की पुलिस की मदद से मोबाइल तेजी से बरामद किए गए।
सुदूर गांवों तक पहुंचे मोबाइल
मंडला पुलिस ने मोबाइलों के वितरण की प्रक्रिया को भी विकेन्द्रीकृत किया। अब मोबाइल सीधे पुलिस स्टेशन स्तर पर या माइक्रो बीट पुलिसकर्मियों द्वारा दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों के घर जाकर सौंपे जाते हैं। इस पहल से उन ग्रामीण और आदिवासी लोगों तक उनके मोबाइल वापस पहुंचे, जिन्हें पहले लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।










