ग्रामीणों को परोसी कीड़े लगे गुड़ की चाय

ग्रामीणों को परोसी कीड़े लगे गुड़ की चाय, छात्रावास अधीक्षक पर गंभीर आरोप

  • वायरल वीडियो से हुआ खुलासा
  • ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में एक वायरल वीडियों में ग्रामीणों को कीड़े वाले गुड़ की चाय पिलाने का मामला सामने आया है। यह घटना विगत माह स्वतंत्रता दिवस के अवसर का है, जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, वहींमंडला जिले के ग्राम खलौडी में संचालित नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास में उपस्थित हुए ग्रामीणों को कीड़े लगे गुड़ की चाय परोस दी गई। यह आरोप छात्रावास अधीक्षक पूजा डोंगरे पर लगे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि 15 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में उन्हें कीड़े लगे गुड़ से बनी चाय परोसी गई, जिससे कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी।

बताया गया कि यह घटना उस समय सामने आई जब एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर अधीक्षक पूजा डोंगरे अपने कर्मचारियों से यह कहते हुए सुनाई देती हैं, कि ग्रामीणों को कीड़े वाले गुड़ की चाय ही पिलाओ और मेरे लिए दूसरी चाय बनाना। इस वीडियो के सामने आने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और भी भड़क गया। ग्रामीणों का कहना है कि कीड़े लगे गुड़ की चाय पीने के बाद कुछ लोगों को उल्टी और स्वास्थ्य संबंधी अन्य परेशानियां हुईं, जिसके बाद उन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी पड़ी। इस घटना से ग्रामीण बेहद नाराज हैं और उनका कहना है कि अगर अधीक्षक का ग्रामीणों के प्रति ऐसा रवैया है, तो छात्रावास में रहने वाली बालिकाओं के भोजन और स्वास्थ्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधीक्षक पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। बालिकाओं के अभिभावकों ने भी इस आरोप को गंभीर बताते हुए कहा कि अगर अधीक्षक दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें तुरंत उनके पद से हटाया जाना चाहिए जिससे बच्चियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सके।

अधीक्षक ने दी सफाई 

इस मामले पर अपनी सफाई देते हुए छात्रावास अधीक्षक पूजा डोंगरे ने कहा कि गुड़ खराब था, जिसके बाद दूसरा गुड़ और शक्कर मंगवाकर चाय बनाई गई। उन्होंने वायरल वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है। हालांकि ग्रामीण उनकी इस सफाई को मानने को तैयार नहीं हैं। उनका तर्क है कि अगर गुड़ खराब था तो शुरुआत में ही उसका इस्तेमाल क्यों किया गया?


 

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