आज 27 अगस्त को सुबह 11.05 मिनट में मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, 08 सितंबर होगा गणेश विसर्जन
- दुर्लभ संयोग में आज विराजेंगे भगवान गणपति
- प्रतिमाएं ले जाने का क्रम शुरू
मंडला महावीर न्यूज 29. देवों में प्रथम पूज्य भगवान गणेश की स्थापना हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ की आज की जायेगी। जिसके लिए तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। पंडालों को अंतिम रूप दे दिया गया है। गणेशोत्सव समिति ने बारिश को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए है। गणेश प्रतिमाएं दो दिन पहले से मूर्तिकार अङ्क्षतम रूप दे चुके है। स्थानीय मूर्तिकारों के द्वारा निर्मित प्रतिमाओं के अलावा अन्य स्थानों से लाई गई प्रतिमाएं भी शामिल है। सराफा दुकानो में चांदी की प्रतिमाएं आर्कषण बनी हुई है। लोग मनमोहक मूर्तियां स्थापित करने के लिए ला रहे है। आज गणेश चतुर्थी पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। गणेशोत्सव पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष बुधवार 27 अगस्त के दिन भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। बताया गया कि विनायक चतुर्दशी आज मध्याह्न काल में गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11.05 बजे से दोपहर 01.40 बजे तक रहेगा। इस वर्ष गणेश चतुर्थी में प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि, रवि के साथ इंद्र, ब्रह्म योग का संयोग बना रहेगा। वहीं कर्क में बुध और शुक्र के होने से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। इसके साथ ही गणेश चतुर्थी पर बुधवार का महासंयोग इस तिथि को कई गुना बढ़ा रहा है।
जानकारी अनुसार स्थानीय समितियों के अलावा घरों में स्थापित की जाने वाली एवं दूरस्थ क्षेत्रों को जाने वाली प्रतिमाओं को ले जाने क्रम गणेश स्थापना के एक दिन पहले पूरे दिन चलता रहा। दस दिवसीय गणेशोत्सव के लिए सभी लोगों में विशेष उत्साह है। मिष्ठïान भंडार में मोदक,लड्डू बन चुकें है। जिसमें मोदक अधिक तादाद में बनाये गए है। नगर के 24 वार्डो के प्रमुख स्थानों में सार्वजनिक स्तर पर गणेश स्थापना की जाती है। इसके अलावा बड़ी संख्या में घरों में भी गजानन स्थापित किए जाते है। दस दिन तक चलने के बाद इस उत्सव का समापन अनंत चौदस को किया जायेगा। गणेशोत्सव पर्व में नगर में धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलेगा।
पूजा करने मात्र से मिलेगा फल
पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि आज गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। भक्त मनवांछित फल प्राप्ति के लिए गणपति को प्रसन्न करने पूजन, अर्चन करेंगे। बताया गया कि गणपति की पूजन करते समय हल्दी की 5 गांठ श्री गणाधिपतये नम: मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं, 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगा श्री गजवकत्रम नमो नम: का जप कर चढ़ाएं, ये उपाय लगातार 10 दिन तक करें। इससे आपके काम में प्रमोशन होने की संभावनाएं बढऩे के साथ कार्यस्थल आ रही परेशानियां भी खत्म होने लगेगी।
लगाया हाथी का सिर
जब इस घटना का पता माता पार्वती को चलता है, तो वह भोलेनाथ पर क्रोधित हो उठती हैं। माता पुत्र वियोग को सह नहीं पाती हैं और शिवजी से गणेश को पुन:जीवित करने के लिए कहती हैं। तब शिवजी अपने गणों को धरती पर भेजते हैं और कहते हैं कि जो मां अपने बच्चे से उलट मुख किए हो, उसका सिर काट लाएं। गणों को ऐसी कोई मां नहीं मिलती, जो अपने बच्चे से मुंह मोड़े हो। ऐसे में उन्हें एक हथनी मिलती है, जो बच्चे की ओर मुंह नहीं किए होती है। गण हाथी के बच्चे का शीश काटकर ले जाते हैं और इस प्रकार गणेश जी को गजानन का शीश लगाकर पुन: जीवत किया जाता है। इसीलिए उनका नाम गजानन पड़ा।
…तो लगता है चोरी का आरोप
कहते हैं जो भक्त भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा के दर्शन करता है, उसे चोरी आदि का आरोप झेलना होता है। श्रीकृष्ण से एक बार यह गलती हो गई थी, तब उन पर स्यमंतक मणि चुराने का आरोप लगा था। अगर कोई गलती से इस दिन इस चंद्रमा के दर्शन कर लेता है तो उसका पाप स्यमंतक मणि कथा पढ़ कर समाप्त हो जाता है।
विघ्नों से मिलेगी मुक्ति
अगर कोई व्यक्ति सुबह बिस्तर से उठने से पहले गणेश के 12 नाम- सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन आदि नाम लेकर दायां पैर धरती पर रखता है, तो उसे हर प्रकार के विघ्नों से मुक्ति मिलेगी। गजानन के इन नामों को जपने से संकट तत्काल भाग खड़ा होता है। गण का अर्थ है वर्ग, समूह और समुदाय तथा ईश का अर्थ है स्वामी। शिवगणों और गण देवों के स्वामी होने के कारण इन्हें गणेश कहा जाता है। आठ वसु, ग्यारह रुद्र और बारह आदित्य ही गणदेवता कहलाते हैं।










