गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार

गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार

  • गणेशोत्सव की तैयारी शुरू, एक से पांच फिट तक की बना रहे मूर्तियां
  • छोटी गणेश प्रतिमाओं का बढ़ा चलन

मंडला महावीर न्यूज 29. गणेशोत्सव पर्व के लिए मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं। विगत चार वर्षो से प्रतिमाओं का आकार पहले से छोटा हो गया है। गणेश प्रतिमाएं इस वर्ष अधिकत्तर एक से पांच फिट तक की बनाई जा रही है। वहीं इस वर्ष भी बड़ी मूर्तियों की जगह अधिकत्तर छोटी मूर्तियों को आकार देने के साथ ही अंतिम रूप देने में मूर्तिकार लगे हैं। खास मांग पर ही कुछ बड़ी प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। गणेश चतुर्थी में अब चार दिन ही शेष बचे है। गणेश प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकारों ने मूर्तियों को रूप दे दिए है, अब उन्हें रंग और सजाने की तैयारी कर रहे है।

स्थानीय मूर्तिकार लक्ष्मी नारायण ने बताया कि अभी गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे है। प्रतिमाओं में कलर किया जा रहा है, जिससे समय रहते मूर्तियां भक्तों के लिए तैयार रहे। गणेश मूर्तियों के साथ दुर्गा प्रतिमाओं की भी तैयार की जा रही है। फिलहाल मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे है, जो जिले के अलग-अगल क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे। मूर्तिकार लक्ष्मी नारायण एक बेहद हुनूर मंद मूर्तिकार है। इनकी द्वारा बनाई गई प्रतिमाओं की चर्चा हमेशा रहती है।

जानकारी अनुसार जिले के बहुत से मूर्तिकार घर पर ही मूर्तियां बनाने में जुटे हुए हैं। विगत वर्षो से छोटी मूर्तियां अधिक बना रहरी है। गणेश उत्सव समितियों के द्वारा ऑर्डर मिलने पर ही मूर्तिकार बड़ी मूर्तियां बना रहे है। मूर्तिकार लक्ष्मी नारायण ने बताया कि इस वर्ष गणेश प्रतिमाएं करीब चार से पांच फिट तक की बना रहे है। करीब 150 मूर्तियां बनाई है। जिनमें कुछ मूर्तियां आर्डर की है। ऐसे ही मुख्यालय के और अन्य मूर्तिकार छोटी, बड़ी मूर्तियां बना रहे है। मूर्तिकार इस बार भगवान गणेश के सांचे में विविध स्वरूप की मूर्तियां बना रहे है। मूर्तियों में गणेश भगवान चूहे, गरुण, मोर, पर्वत और कोई आसन लगाए बैठे हैं। देखने में की मूर्तियां अधिक आकर्षक लग रही है।

समितियों के आर्डर मिले कम 

मूर्तिकार ने बताया कि इस बार भी समितियों द्वारा बड़ी प्रतिमाओं के ऑर्डर कम ही मिले है। जिले में अनेक समिति द्वारा गणेश प्रतिमाओं की स्थापना नहीं की जा रही है। जिसके कारण सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियों के द्वारा पंडालों में गणेश प्रतिमा रखने पर संशय बना हुआ है। महाराजपुर के मूर्तिकार ने बताया कि पहले श्रद्धालु साइज के हिसाब से ही मूर्तियां खरीदते थे, लेकिन अब सुंदरता, कलर मैचिंग, कपड़े व सजावट को भी पैमाना मानते हैं। मूर्तिकार का कहना है कि अभी छोटी मूर्तियां बनाई जा रही जो घर-घर में विराजमान होने अच्छी मांग रहती है।

सिर्फ मिट्टी की मूर्ति करते हैं तैयार 

बताया गया कि जिले में जेल घाट, रामलीला मैदान, महाराजपुर संगम मार्ग के पास समेत अन्य स्थानों के मूर्तिकार ने बताया कि कई वर्षों से मूर्ति निर्माण करने का कार्य कर रहे। मुख्यालय के मूर्तिकार सिर्फ मिट्टी की मूर्ति बनाते हैं। वहीं कुछ मूर्तिकारों के द्वारा मूर्ति जल्दी तैयार करने के लिए पीओपी का भी इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटते हैं। मूर्तिकारों ने बताया कि हम लोग मूर्तियों को रंगने के लिए भी प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करते हैं। जिसके कारण उनके द्वारा बनाई गई मूर्तियां पानी में आसानी से घुल जाती है और पर्यावरण को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

बड़ी मूर्तियों की मांग कम 

स्थानीय मूर्तिकार ने बताया कि विगत पांच वर्षो से बड़ी मूर्तियां कम स्थापित हो रही है। जिले के खास-खास पंडालों में ही पांच फिट से बड़ी मूर्तियां स्थापित की जाती है, वहीं अब घर-घर में गणेश बप्पा विराजमान होने लगे है। जिसके कारण छोटी गणेश प्रतिमाओं का क्रेज बढ़ गया है। अब प्रतिवर्ष छोटी मूर्तियों की मांग बढऩे लगी है। जिसके कारण मूर्तिकार अब नए-नए डिजाईन में छोटी गणेश प्रतिमा बना रहे है।



 

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