मट्टी की प्रतिमा में पंच तत्वों का होता है समावेश
- मिट्टी के गणेश ही सबसे शुभ
- अपने हाथों से बनाए मिट्टी की गणेश प्रतिमा, यह सबसे शुभ
मंडला महावीर न्यूज 29. देश भर में 27 अगस्त से पूरे उत्साह और भक्ति भाव से गणेशोत्सव पर्व मनाया जाएगा। 10 दिनों तक घर-घर और पंडालों में गणपति बप्पा मोरिया की गूंज सुनाई देगी। छोटी से लेकर बड़ी आकार की गणेश प्रतिमा स्थापित कराई जाएगी। गणेश उत्सव के लिए वैसे तो बाजार में तरह तरह की खूबसूरत छोटी से लेकर बड़ी गणेश प्रतिमा आसानी से मिल रही है, लेकिन अपने घर में अपने हाथों से मिट्टी के गणेश की इको फ्रेंडली प्रतिमा बनाकर पूजा अर्चना करना सबसे उत्तम माना जाता है।
बताया गया कि गणपति प्रतिमा मिट्टी की हो तो ज्यादा अच्छी मानी जाती है। मिट्टी की प्रतिमा में पंचतत्व जिसमें भूमि, जल, वायु, अग्रि और आकाश विलीन करता है। धार्मिक ग्रंथो और विशेषज्ञों की माने तो मिट्टी से बनी मूर्ति में भगवान का वास होता है और भगवान भी इससे ही प्रसन्न होते है। मिट्टी की प्रतिमा की पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। स्वयं द्वारा मिट्टी की बनाई गई प्रतिमा को हम शुभ मुहूर्त पर स्वयं बनाकर घर में स्थापित कर सकते है।
देवी पार्वती ने बनाई थी मिट्टी की गणेश प्रतिमा
बताया गया कि माता पार्वती ने सबसे पहले मिट्टी से ही गणेश प्रतिमा बनाई थी। देवी पार्वती ने पुत्र की इच्छा पर मिट्टी का पुतला ही बनाया था, जिसमें भगवान शंकर ने प्राण डाला था। जिसके बाद उस मिट्टी के पुतले से भगवान गणेश के रूप में प्रकट हुए थे। शिव पुराण में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है।
ऐसे हुआ था बप्पा का जन्म
हिन्दू धर्म में भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी का जन्म हुआ है। इनके जन्म से संबंध में कई कथाएं पुराणों में मिलती हैं। शिवमहापुराण की रुद्रसंहिता में वर्णन है कि कुमारिका खंड में माता पार्वती जी ने अपने उबटन से एक पुतला बनाया। इस पर अपना रक्त छिड़क कर उसे जीवित कर दिया। कथा में आगे बताया गया कि माता पार्वती गणेश को द्वार पर पहरा देने का आदेश देकर स्नान करने चली गईं। इसी दौरान भगवान शिव वहां आते हैं, तो गणेश उन्हें अंदर जाने से रोक देते हैं। क्रोधित शिवजी गणेश जी का सिर काट देते हैं।
इनका कहना है
धर्मशास्त्रों में मिट्टी व गोबर के गणेश जी शुभ व फलदायी बताया गया है। विवाह समारोह में गाय के गोबर के श्रीगणेश की स्थापना की जाती है। गणेशोत्सव में भी मिट्टी के श्रीगणेश की स्थापना की जानी चाहिए। क्योंकि मिट्टी के गणेश आसानी से जल में विसर्जित हो जाते हैं और जलीय जीव जंतुओं का जीवन भी खतरे में नहीं पड़ता है। जबकि पीओपी के श्री गणेश ही जल में कई दिनों तक विसर्जित नहीं होते हैं।

आचार्य संतोष महाराज, ऊं श्री माँ रूकमणी देवी सदाव्रत आश्रम, हिरदेनगर
पौराणिक कथा के अनुसार मिट्टी से बनी मूर्ति में भगवान गणेश जी का वास होता है। मिट्टी के बने हुए गणेश जी से माँ लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा करने से कई यज्ञों का फल मिलता है। पूजा करते समय भगवान गणेश जी की मिट्टी से बनी मूर्ति होना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि मिट्टी में पांच तत्व होते हैं। भूमि, अग्नि, जल,वायु और आकाश यह सब एक मिट्टी में होते हैं।

पंडित नीलू महाराज, वरदान आश्रम, अंजनिया
हिंदू ग्रंथों और पुराणों में भी मिट्टी से बनी गणेश मूर्ति के लाभ बताए गए हैं। मिट्टी से बनी गणेशजी की मूर्ति पर्यावरण के लिए तो लाभकारी होती ही है, लेकिन साथ में इसके पूजन से गणेशजी भी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। आज के सोशल मीडिया के जमाने में मिट्टी के गणेशजी का चलन जरूर बढ़ा है। बहुत से लोगों ने मिट्टी के गणेश जी घर लाना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ इसे खुद अपने घर भी बनाते हैं।

स्वामी सच्चिदानंद महाराज, सुरंगदेवरी आश्रम
गणेश चतुर्थी का पावन पर्व शुरू होने वाला है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था। इसे लेकर भक्तों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। इस दिन हर भक्त अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करता है। अधिकतर लोग बाजार से प्लास्टर ऑफ पेरिस की बनी मूर्ति ही लाते हैं। लेकिन ऐसी मूर्तियाँ न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है बल्कि शास्त्रों में भी इनकी मनाही है।

ललित मिश्रा, सांई भक्त, श्री सिद्धेश्वर धाम, सुरंगदेवरी










