दुपट्टा घाट उपेक्षा का शिकार, भक्तों को परेशानी

दुपट्टा घाट उपेक्षा का शिकार, भक्तों को परेशानी, विकास ठप्प

  • प्रशासन कर रहा अनदेखी
  • श्रृद्धालु और ग्रामीणों को हो रही परेशानी
  • स्थानीय लोगों में आक्रोश
  • सड़क और घाट न बनने से धार्मिक गतिविधियों में बाधा

मंडला महावीर न्यूज 29. विकासखंड नारायणगंज के ग्राम बबलिया में नर्मदा तट स्थित दुपट्टा घाट, जो दुर्वासा आश्रम तपोभूमि के नाम से भी जाना जाता है। इस तपोभूमि पहुंचने के लिए आज भी पहुंच मार्ग की सुविधा नहीं है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर मकर संक्रांति, शिवरात्रि और अन्य पर्वों पर नर्मदा दर्शन और पूजा-पाठ के लिए पहुंचते हैं। बावजूद इसके सड़क और घाट के लिए पहुंच मार्ग नहीं होने से स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं के तहत घाटों और पहुंच मार्गों का निर्माण होता है, लेकिन सरपंच और सचिवों की अनदेखी और मिलीभगत के कारण दुपट्टा घाट पर आज तक कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। लोगों को आज भी कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से नर्मदा नदी और दुर्वासा आश्रम तक पहुंचना पड़ता है। बताया गया कि दुर्वासा आश्रम लगभग 50-60 गांवों से जुड़ा हुआ है। हाल ही में एक संत ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से यहां एक भव्य भोले बाबा का मंदिर, साधु-संतों के रुकने के लिए आश्रम और भोजन की व्यवस्था की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां व्यक्तिगत स्तर पर विकास संभव है, लेकिन शासन द्वारा मिलने वाली सुविधाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, सचिव और अन्य संबंधित अधिकारी अपनी जेब भरने में लगे हैं और सार्वजनिक उपयोग के लिए बनी योजनाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। यदि दुपट्टा आश्रम में पहुंच मार्ग और घाट का निर्माण हो जाए, तो न केवल स्थानीय लोगों को सुविधा होगी, बल्कि मकर संक्रांति, शिवरात्रि, अमावस्या और पूर्णिमा जैसे पर्वों पर अधिक श्रृद्धालुओं की संख्या बढऩे के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही यहां आने वाले परिक्रमावासियों और श्रद्धालुओं को भी काफी राहत मिलेगी।

लोगों का कहना है कि मंडला जिले के कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां परंपरागत रूप से हिंदूवादी संगठन और श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन शासन की उदासीनता के कारण इन क्षेत्रों का विकास नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायतों को हर साल करोड़ों रुपये का फंड मिलता है, लेकिन इसका उपयोग सही ढंग से नहीं होता और विकास की गति कछुए की चाल में चल रही है।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और दुर्वासा आश्रम के नजदीकी ग्राम ओढारी, बड़झर और धनगांव शामिल हैं, जिनसे अनुरोध किया है कि वे इस मामले पर ध्यान दें। उन्होंने मांग की है कि नर्मदा नदी दुर्वासा आश्रम तक पहुंचने के लिए पक्के मार्ग और घाटों का निर्माण कराया जाए, जिससे न केवल लोगों को सुविधा होगी, बल्कि मजदूरों को भी रोजगार मिलेगा। यह विकास कार्य क्षेत्र की आर्थिक और धार्मिक दोनों ही स्थितियों में सुधार लाएगा।

इनका कहना है

दुर्वासा आश्रम में हर पर्व पर हजारों लोग आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। अगर सड़क और घाट बन जाएं तो यहां पर्यटन बढ़ेगा और गांव के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।


छोटे लाल यादव

यह बहुत दुख की बात है कि इतना महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल होने के बावजूद यहां की हालत जस की तस है। हमें हर साल पर्वों पर आने वाले श्रद्धालुओं को कच्ची सड़क से ले जाना पड़ता है। लगता है अधिकारियों को हमारी परेशानियों से कोई मतलब ही नहीं है।


राधेश्याम यादव



 

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