धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने 17 वर्ष से सावन में कर रहे महारूद्राभिषेक
- माहिष्मती घाट में 17 वें वर्ष हुआ भव्य महाअभिषेक
- सैकड़ों श्रृद्धालुओं ने द्वादश ज्योतिर्लिंग में मांगी मन्नतें, शिव भक्ति में डूबा मंडला
मंडला महावीर न्यूज 29. सावन मास की पावनता और भगवान शिव की भक्ति का एक अनुपम संगम मंडला जिले के प्रसिद्ध माहिष्मती घाट पर एक बार फिर देखने को मिला। यहाँ स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग में विगत 17 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी सावन के दूसरे सोमवार को भव्य महा रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया।
सुबह से ही घाट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा भाव से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और अपनी मनोकामनाएं अर्पित कीं। कार्यक्रम के मुख्य आचार्य पंडित सुभाष तिवारी ने विधिवत मंत्रोच्चारण और वैदिक विधियों से भगवान शिव की पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
भक्तों ने किया रूद्राभिषेक
बताया गया कि इस अवसर पर मंडला शहर के कई प्रमुख शिवभक्त और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें दीपक बैरागी, कुनाल लहेरिया, संध्या शिवहरे, संतोषी सिंगरौरे, चिक्की सिलेवार, अमित देशराज, आकांक्षा, चीकू, रोहित बघेल, ललित, आशु, रघुवंशी, मोनिका चौरसिया और त्रिभुवन नाथ द्विवेदी सहित सैकड़ों श्रद्धालु शामिल थे। सभी ने पूजन में सहभागिता कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। घाट पर सुबह से शाम तक पूजा, रुद्रपाठ, भजन-कीर्तन और शिव चालीसा पाठ की मनोहारी प्रस्तुतियों से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा। भक्तों ने जल, दूध, शहद, दही और घी से रुद्राभिषेक कर शिवलिंग को स्नान कराया।
धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाने का प्रयास
पंडित सुभाष तिवारी ने बताया कि यह महाअभिषेक विगत 17 वर्षों से लगातार सावन मास के प्रत्येक सोमवार को पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ रहा है। मंडला के धार्मिक इतिहास में माहिष्मती घाट का विशेष स्थान है, और यहाँ पर द्वादश ज्योतिर्लिंग की मान्यता के साथ होने वाले यह अभिषेक आयोजन स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से आने वाले शिव भक्तों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं।












