प्रतिबंध के बावजूद बेखौफ पकड़ रहे मछलियां
- बिक रही मछलियां, मत्स्याखेट पर कार्रवाई नहीं
- कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर औपचारिकता निभा रहे अधिकारी
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला में 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पूर्णत: प्रतिबंध कर दिया गया है। जिसके लिए अधिसूचना भी जारी है। बावजूद इसके मत्स्याखेट के लिए बनाए गए नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है, लेकिन यहां संबंधित विभाग इस बात से बेफ्रिक है, और हो भी क्यों ना। यह सब खेल संबंधित विभाग की मिलीभगत से ही संभव है। अन्यथा आदेश और नियम लागू हुए है तो कार्रवाई कैसे नहीं की जा रही है। बताया गया कि 15 अगस्त तक मछलियों के आखेट पर प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया है, बावजूद इसके निरंतर मछलियों का शिकार जारी है। इतना ही नहीं खुलेआम व्यापारी मछलियों का विक्रय भी करते नजर आ रहे, लेकिन इस पर कार्यवाही करने में विभाग पूरी तरह से नाकाम दिखाई दे रहा है। बाजार समेत मुख्यालय के आसपास भारी तादाद में मछलियां विक्रय की जा रही है। कार्रवाई के नाम पर विभागीय अमला केवल औपचारिकता का ही निर्वहन करते नजर आ रहा है। यहां प्रतिबंध के आदेश की धज्जियां उड़ रही है।
जानकारी अनुसार प्रजनन काल में मछलियों का उत्पादन प्रभावित ना हो इसके लिए शासन स्तर से मछली के शिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंधात्मक आदेश के पालन के लिए जिम्मेदार मछली पालन विभाग को मत्स्याखेट रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडला जिले के नदी, नाले, जलाशय और तालाब से जमकर मत्स्याखेट किया जा रहा है। मछुआरो ने जाल फैला रखे है। नर्मदा में डोंगी से मछलियो की तलाश की जा रही है लेकिन मछली पालन विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिले भर में मत्स्याखेट और मछली विक्रय जमकर जारी है। खुलेआम जिला मुख्यालय समेत आसपास के क्षेत्रों में इसका नाजारा देखने को मिल रहा है। लेकिन मछली विक्रय करने वाली की भी मजबूरी है कि उनके पास इस दो माह अपने भरण पोषण के लिए दूसरा कोई कार्य नहीं रहता है। जिसके कारण मजबूरी में भी इनको मछली विक्रय करनी पड़ती है।
आखेट रोकने कोई खास कदम नहीं
मत्स्य विभाग ने 16 जून से 15 अगस्त तक के लिए मछलियो के परिवहन, ंविक्रय और आखेट पर प्रतिबंध लगाया है। जिले के नदी, नाले व तालाब में मछुआरे मत्स्याखेट कर रहे है। बारिश के दौरान नगर से सटे नर्मदा तट के अलावा छोटे जलाशय में भी मत्स्याखेट चल रहा है। नर्मदा नदी में खुलेआम मत्स्याखेट किया जा रहा है लेकिन विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिला मुख्यालय के समीप सहस्त्रधारा के नर्मदा नदी में मछुआरे डेरा डाले हुए है। डोगियो के सहारे मछलियो को पकड़कर पानी से बाहर निकाला जा रहा है। नर्मदा से बड़ी और छोटी मछलियों का आखेट बेरोकटोक जारी है। विभाग द्वारा आखेट को रोकने के लिए खास कदम नहीं उठा रहा है।
यहां चल रहा मत्स्याखेट
मछलियो के आखेट के बाद बाजार में खुलेआम इसका विक्रय किया जा रहा है। मंडला के मछली बाजार, कारीकोन तिराहा, कटरा, देवदरा के रमपुरा क्षेत्र, बिछिया, घुघरी, बम्हनी, अंजनिया, निवास, बीजाडांडी, नारायणगंज में विक्रय हो रहा है। बताया गया है कि बरगी बांध के डूब क्षेत्र से जमकर मत्स्याखेट हो रहा है। चिरईडोंगरी और ग्वारी, बबैहा समेत फूलसागर के पास बड़ी-बड़ी मछली का आखेट कर जबलपुर भेजी जा रही है। महाराजपुर थाना के सिलपुरा के आसपास मत्स्याखेट किया जाता है। इसके बाद मछली को वाहनो में लोड कर मंडला लाया जा रहा है। नगर में हनुमान घाट, रंगरेज घाट, नाव घाट, संगम घाट में मछुआरे बंशी डालकर बैठे देखे जा सकते है।
आदेश का नहीं हो रहा पालन
शासन के निर्देशानुसार 16 जून से 15 अगस्त तक सम्पूर्ण जिले में मत्स्य आखेट और मत्स्य परिवहन निषेद्ध रहने के आदेश पारित किए गए थे, जिसमें प्रतिबंध अवधि में मत्स्याखेट कार्य करना, मत्स्य परिवहन करना एवं मत्स्य विक्रय करना दंडनीय अपराध बताया गया। इस नियम के उल्लंघनकर्ता को एक वर्ष का कारावास और 5 हजार रूपये तक का जुर्माना या दोनों से दण्डित किये जाने का प्रावधान है। सवाल उठता है जब विभाग ने आदेश पारित किए तो उस पर अमल क्यों नहीं हो रहा है? शहर के जागरूक लोगों ने कहा कि प्रशासन अपने ही नियमों का पालन कराए अन्यथा जनता का विश्वास प्रशासन से उठ जाएगा।
दो माह के लिए लगता है प्रतिबंध
बात दे कि मछलियों के सामान्य प्रजनन-काल के लिहाज से मत्स्याखेट पर यह प्रतिबंध हर साल 15 जून को लगाया जाता है जो 15 अगस्त तक की अवधि के लिए प्रभावशील रहता है और इस दौरान इस निषेधाज्ञा के उल्लंघन को दण्डनीय अपराध घोषित किया जाता है। यह बात अलग है कि ना तो उक्त प्रावधान और निषेधाज्ञा के अनुपालन की मैदानी तौर पर कोई निगरानी जिले में इस वर्ष कही नहीं देखी गई।
कार्यवाही के नाम पर विभाग की खानापूर्ति
जिले में प्रतिबंध काल में हजारों किलो मछली नर्मदा नदी, बंजर नदी, तालाब समेत अन्य जलाशयों से पकड़ी जाती है। जिसे जिले समेत जिले के बाहर चौपहिया वाहनों में बर्फ में सहज कर ले जाया जाता है, इस बात की जानकारी मत्स्य विभाग को रहती है, लेकिन मछली बेचने वालों और विभाग की मिली भगत से प्रतिवर्ष हजारों किलो मछलियों का व्यापार अवैध रूप से कर दिया जाता है, और कार्रवाई के नाम पर खाना पूर्ति कर इतिश्री कर दी जाती है। इस प्रतिबंध काल में लाखों का व्यापार मछली के व्यापारी करते है।











