नवजात शिशु मृत्यु दर में 7 प्रतिशत की आई कमी

नवजात शिशु मृत्यु दर में 7 प्रतिशत की आई कमी

  • नई सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ का मिल रहा अच्छा परिणाम

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिला अस्पताल में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई नवजात शिशुओं के जीवन बचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिससे जिले में नवजात शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ वर्षों से 10-12 प्रतिशत पर स्थिर रही। यह मृत्यु दर अब जनवरी से जून 2025 तक के पहले छह महीनों में घटकर मात्र 7 प्रतिशत पर आ गई है, जो सरकार के 10 प्रतिशत से कम के मानक के अनुरूप है।

जानकारी अनुसार यह उपलब्धि सरकार द्वारा एसएनसीयू सुविधाओं में किए गए लगातार सुधारों का परिणाम है। इन प्रयासों में स्टाफ और डॉक्टरों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उनके कौशल को बढ़ाना है। इसके साथ ही आधुनिक मशीनों और उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है, जिससे नवजात शिशुओं को बेहतर और अधिक प्रभावी उपचार मिल सके।

शिशु मृत्यु दर में आई कमी

बताया गया कि मंडला जिला अस्पताल में एसएनसीयू उन नवजात शिशुओं के लिए एक जीवन रेखा है, जिनका जन्म समय से पहले हुआ है, कम वजन है, सांस लेने में कठिनाई है, पीलिया है या किसी संक्रमण से जूझ रहे हैं। यह इकाई इन नाजुक शिशुओं को विशेष देखभाल और निगरानी प्रदान करती है। सीएमएचओ डॉ. डीजे मोहंती ने बताई की कि आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में 1910 नवजात शिशुओं को एसएनसीयू में उपचार के लिए भर्ती किया गया था, जबकि 2024-25 में यहां नवजात शिशुओं की भर्ती संख्या 1837 हो गई।

चिकित्सकों की टीम है समर्पित 

बताया गया कि सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे के कुशल नेतृत्व में डॉ. अंकित चौरसिया, डॉ. कमलेश ठाकुर और डॉ. अलका तेजा की समर्पित टीम प्रोटोकॉल के तहत नवजात शिशुओं का उपचार कर रही है। नर्सिंग स्टाफ दिन-रात बच्चों की कड़ी निगरानी और सेवा में लगा रहता है, जो इस सफलता में एक महत्वपूर्ण योगदान है। डॉक्टरों की टीम का कहना है कि उनका प्रयास है कि सभी नवजात बच्चों को सर्वोत्तम इलाज मिले और यह मृत्यु दर भविष्य में और भी कम हो।

इनका कहना है

कम वजन एवं कमजोर नवजात बच्चों के लिए जिला चिकित्सालय में गहन शिशु चिकित्सा ईकाई संचालित है। यहां चिकित्सक की टीम समेत बच्चों को प्रोटोकाल के अनुसार चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाती है, अभिभावकों को बताया जाता है कि कम वजन एवं कमजोर बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती कराएं।


डॉ. डीजे मोहंती
सीएमएचओ, मंडला



 

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