सीड बॉल क्रांति-31 हजार बीज गेंदों से बंजर भूमि को हरा-भरा करने की पहल

सीड बॉल क्रांति-31 हजार बीज गेंदों से बंजर भूमि को हरा-भरा करने की पहल

  • महिलाओं ने संभाली पर्यावरण संरक्षण की कमान
  • आर्थिक सशक्तिकरण का भी दिया संदेश

मंडला महावीर न्यूज 29. पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए मंडला जिले के घुघरी विकासखंड में कार्ड संस्था ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सीड बॉल क्रांति के तहत 31 हजार बीज को गेंदों के माध्यम से बंजर भूमि को हरा-भरा करने की अभिनव पहल की है। बताया गया क कार्ड संस्था द्वारा संचालित कम्युनिटी इंगेजमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई 31 हजार सीड बॉल्स को बंजर और पहाड़ी भूमि में स्थापित किया गया है। इस आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायालय मंडला के सचिव, न्यायिक मजिस्ट्रेट तपन धारगा, कार्ड संस्था से चेयरपर्सन लोकेश उपमन्यु, थाना घुघरी से मनोज गौतम, ग्राम पंचायत मांगा की सरपंच तारावती पूषाम, सचिव संजू पूषाम और आजीविका परियोजना विकासखंड प्रबंधक दीपक बाजपेयी एवं सौरभ उपाध्याय ने सक्रिय रूप से अपनी सहभागिता दी है।

जानकारी अनुसार सीड बॉल मिट्टी, खाद और बीजों से बना एक छोटा गोला होता है, जो पौधरोपण का एक आसान और प्रभावी तरीका है। यह तकनीक उन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी है जहाँ पारंपरिक पौधरोपण चुनौतीपूर्ण होता है, जैसे कि परती, बंजर या पहाड़ी भूमि। मंडला जिले के घुघरी विकासखंड में अप्रैल माह से ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया था। इन महिलाओं ने करंज, शीशम, सीताफल, नीम, जामुन, महुआ और आम जैसे उपयोगी और स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग करके लगभग 31 हजार सीड बॉल तैयार किए। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने का भी एक अनुकरणीय उदाहरण है। सीड बॉल बनाने की प्रक्रिया में महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया, जिससे उन्हें न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिला, बल्कि एक नई आजीविका का साधन भी प्राप्त हुआ।

घुघरी के ग्राम मांगा में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट तपन धारगा ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर सीड बॉल्स को परती और पहाड़ी भूमि में स्थापित किया। उन्होंने ग्राम पंचायत परिसर में करंज के पौधे भी रोपित किए। अलका झारिया, रागिनी हरदहा, तारेंद्र झारिया, छाया बैरागी, कृषि विशेषज्ञ सतेंद्र झारिया, अंकित धारपुरे के कुशल मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर न्यायिक मजिस्ट्रेट तपन धारगा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। सीड बॉल जैसी सरल तकनीक के माध्यम से हम न केवल बंजर भूमि को हरा-भरा बना सकते हैं, बल्कि भावी पीढिय़ों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

कार्यक्रम संयोजक पंकज चौरसिया ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ न केवल अपने परिवार और समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नया इतिहास रच रही हैं। सीड बॉल के माध्यम से हम न केवल हरियाली बढ़ा रहे हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। कार्ड संस्था के लोकेश उपमन्यु ने इस कार्यक्रम के आयोजन में तकनीकी और सामाजिक सहयोग प्रदान किया। उन्होंने बताया कि सीड बॉल्स को विशेष रूप से बंजर और पहाड़ी क्षेत्रों में बिखेरा जाता है, जिससे बारिश के पानी से बीज अंकुरित हो सकें। यह तकनीक न केवल पौधरोपण को आसान बनाती है, बल्कि बीजों को पक्षियों और अन्य प्राकृतिक खतरों से भी बचाती है।

सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता का महत्व 

इस आयोजन में सामुदायिक भागीदारी ने इसे और अधिक प्रभावी बनाया। ग्राम पंचायत मांगा के सरपंच और सचिव ने स्थानीय स्तर पर इस पहल को समर्थन प्रदान किया। आजीविका मिशन के दीपक बाजपेयी ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण जागरूकता और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, सीड बॉल की तकनीक सरल, लागत प्रभावी और पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह ग्रामीण समुदायों को पर्यावरण संरक्षण से जोडऩे का एक शानदार तरीका है।

भविष्य की योजनाएँ 

कार्ड संस्था और आजीविका मिशन ने भविष्य में इस तरह के और अधिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को और अधिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि वे सीड बॉल निर्माण को एक स्थायी आजीविका के साधन के रूप में अपना सकें। इसके अलावा, स्थानीय स्कूलों और युवाओं को भी इस पहल से जोडऩे की योजना है, ताकि अगली पीढ़ी में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।



 

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