परंपरा को चुनौती, झनक लाल ने लिया ऐतिहासिक निर्णय
- 87 वर्षीय झनक लाल ने मृत्यु भोज का किया बहिष्कार, समाज को दी नई राह
मंडला महावीर न्यूज 29. जब समाज सदियों पुरानी रूढिय़ों में जकड़ा हो, तब बदलाव की लौ जलाने के लिए किसी साहसी व्यक्ति की आवश्यकता होती है। बम्हनी बंजर निवासी 87 वर्षीय झनक लाल हरदहा ने ऐसा ही एक अनुकरणीय और ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने अपने ज्येष्ठ पुत्र स्वर्गीय मनमोहन हरदहा के निधन के बाद मृत्यु भोज की रूढि़वादी परंपरा को अस्वीकार करने का क्रांतिकारी निर्णय लिया है।
बताया गया कि स्व. मनमोहन हरदहा का दुखद निधन 12 मई 2025 को मुंबई में हुआ था, जिसके बाद 13 मई को सर्री घाट पर उनका अंतिम संस्कार विधिपूर्वक संपन्न हुआ। इस अत्यंत दुखद घड़ी में भी झनक लाल हरदहा ने समाज के सामने एक नई सोच प्रस्तुत की। उन्होंने मृत्यु भोज जैसे दिखावटी, आर्थिक और मानसिक रूप से बोझिल आयोजन से दूर रहने का संकल्प लिया। उन्होंने दशगात्र के अवसर पर श्री हरदहा ने परिवार और कुटुंबजनों के साथ मिलकर एक शांत, आध्यात्मिक और अर्थपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस अवसर पर सामूहिक पूजन और मृतात्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं की गईं। यह आयोजन आडंबर से रहित, पूर्ण श्रद्धा और धार्मिक विधियों के साथ संपन्न हुआ।
दिलों को छू गया संदेश
झनक लाल हरदहा का कहना था कि वास्तविक श्रद्धांजलि भोज नहीं, सेवा, प्रार्थना और सदाचार है, अब समाज में एक नई सोच का प्रतीक बन चुका है। बताया गया कि झनक लाल हरदहा, हरदहा समाज जिला महासभा मंडला के अध्यक्ष कृष्णकुमार हरदहा के पिता हैं। उनके इस साहसिक निर्णय को समाज के बुद्धिजीवी वर्ग, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से व्यापक सराहना मिली है। यह कदम अब एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। एक ऐसी पहल जो अनगिनत परिवारों को मानसिक और आर्थिक शोषण से मुक्ति दिला सकती है।
जागरूकता और सादगी के नए अध्याय की शुरुआत
हरदहा समाज जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार हरदहा ने कहा कि पिताजी का यह निर्णय समाज में चेतना और परिवर्तन की मिसाल बनेगा। यह केवल परंपरा तोडऩा नहीं, बल्कि नई सोच को अपनाना है। हरदहा समाज के संरक्षक गोपाल हरदहा ने कहा यह निर्णय हमारे समाज में जागरूकता और सादगी के नए अध्याय की शुरुआत है। झनक लाल ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह आने वाली पीढिय़ों के लिए मार्गदर्शक बनेगा। हरदहा समाज के संरक्षक गणेश हरदहा ने कहा यह कदम समाज को बोझिल परंपराओं से मुक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत है। वार्ड क्रमांक 04 के पार्षद एवं समाजसेवी जगदीश हरदहा ने कहा कि झनक लाल जी का निर्णय हमें यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धांजलि कर्म और सेवा से दी जाती है, न कि दिखावे से। समाजसेवी श्रीमती शारदा राजाराम हरदहा ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से महिलाओं और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अक्सर ऐसे आयोजनों में मानसिक और आर्थिक रूप से पीडि़त होते हैं।











