मंडला में खनिज संपदा की लूट जारी, प्रशासन बेखबर

आदिवासी बाहुल्य मंडला में दिनदहाड़े अवैध खनन, खनिज विभाग और प्रशासन की मिलीभगत से माफियाओं के हौसले बुलंद

  • मंडला में खनिज संपदा की लूट जारी, प्रशासन बेखबर
  • किसान की जमीन से बिना लीज के हो रहा मुर्रम का उत्खनन
  • कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला वर्षों से मिट्टी, मुर्रम और रेत सहित अन्य खनिज पदार्थों के अवैध उत्खनन और परिवहन का गढ़ बना हुआ है। यहां दिनदहाड़े जेसीबी मशीनों और हाइवा, डंफर लगाकर अवैध तरीके से मुरुम और मिट्टी का खनन और परिवहन किया जा रहा है, और मंडला जिले की इस लुटती खनिज संपदा को बचाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। खनिज विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद इन पर कोई जांच कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

जानकारी अनुसार जिला मुख्यालय मंडला के नजदीकी ग्राम पटपरा रैयत में जहां बिना लीज के एक किसान की जमीन से अवैध रूप से मुर्रम का खनन किया जा रहा है। इस विषय में ठेकेदार का कहना है कि 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर इसकी लिखा-पढ़ी हो गई है, जबकि यह नियम विरुद्ध कार्य है। इस मामले को लेकर कृषि ग्रामीण मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अनुज दुबे ने बताया कि मंडला जिले के ग्राम पंचायत पटपरा रैयत में किसान के खेत से किए जा रहे अवैध मुर्रम खनन को लेकर माइनिंग अधिकारी को इसकी जानकारी देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की थी। माइनिंग अधिकारी ने भरोसा दिलाया था कि अगले दिन वे ग्राम पंचायत पटपरा रैयत में चल रहे अवैध मुरुम खनन पर कार्रवाई करेंगे।

बताया गया कि अगले दिन जब कृषि ग्रामीण मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अनुज दुबे, समाजसेवी रज्जू यादव के साथ उसी जगह पर पहुंचे, जहां बेखौफ अवैध रूप से मुरुम का खनन किया जा रहा था, तो उन्होंने पाया कि वहां अवैध मुरुम खनन का काम उसी रफ्तार से जारी था। स्थानीय लोगों से जानकारी लेने पर पता चला कि यहां कोई प्रशासनिक अधिकारी या कोई नहीं आया है और न ही इनको रोका जा रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आदिवासी बहुल्य जिला मंडला में ठेकेदारों का कितना दबदबा है। बाहर से काम करने आए ठेकेदारों ने आदिवासी बाहुल्य जिले को अवैध कारोबार का अड्डा बना लिया है। रात-दिन बेखौफ होकर डम्फर और हाइवा से अवैध रूप से मुर्रम का खनन व परिवहन किया जा रहा है। लेकिन खनिज विभाग, राजस्व और प्रशासन के अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं।

बताया गया कि इस उत्खनन की खनिज विभाग सहित प्रशासन के अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी इन माफियाओं पर किसी भी तरह की कार्रवाई न करना समझ से परे है। इससे लगता है कि मंडला जिले के ग्राम पटपरा रैयत सहित अन्य जगहों पर अवैध रूप से चल रहे खनिज संपदा मुर्रम, मिट्टी, रेत, गिट्टी आदि के अवैध उत्खनन व परिवहन से यहां के माइनिंग विभाग को कोई सरोकार नहीं है, और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में ठेकेदारों का प्रशासन चल रहा है।


 

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