जल, जंगल, जमीन को बेहतर करने तीन गांव की चार पहाड़ी में 6400 कंटूर ट्रेंच तैयार

जल, जंगल, जमीन को बेहतर करने तीन गांव की चार पहाड़ी में 6400 कंटूर ट्रेंच तैयार

  • जल स्तर बढ़ाने नाबार्ड व प्रदान संस्था ने तैयार किया मॉडल
  • कन्टूर ट्रेंच जल संरक्षण की कारगर तकनीक, सुधरेगा जलस्तर

मंडला महावीर न्यूज 29. पर्यावरणीय चुनौतियों और गिरता भूजल स्तर जिले के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। इसी चुनौतियों के बीच विकासखंड निवास के तीन ग्राम जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और अनुकरणीय कार्य कर एक मॉडल तैयार किया है। प्रदान संस्था और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के संयुक्त तत्वावधान में वॉटरशेड परियोजना के अंतर्गत कन्टूर ट्रेंच तकनीक का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है, जो क्षेत्र में जल स्तर सुधार की एक मजबूत उम्मीद जगाता है। अनुरुद्ध शास्त्री ने बताया कि विकासखंड निवास के ग्राम थानमगांव, पायलीबाहुर, लौहारी ये तीन गांव की चार पहाड़ी में 6400 कंटूर ट्रेंच बनाए गए है। पायलीबाहुर की दो पहाड़ी में 3200 कंटूर ट्रेंच, थानमगांव की एक पहाड़ी में 1600 और लौहारी की एक पहाड़ी में 1600 कंटूर ट्रेंच बनाए है। इस प्रयास से क्षेत्र का जल स्तर में सुधार आएगा।

जानकारी अनुसार कन्टूर ट्रेंच एक वैज्ञानिक जल संरक्षण विधि है, जिसमें खेतों या ढलानों पर समान ऊंचाई पर लंबी और उथली खाइयां बनाई जाती हैं। वर्षा के दौरान बारिश का पानी इन खाइयों में एकत्र होता है और धीरे-धीरे जमीन में रिसता है। इस प्रक्रिया से न केवल भूजल का पुनर्भरण होता है, बल्कि मिट्टी के कटाव को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जहां जल संकट गहरा रहा है और मानसून की अनियमितता खेती और पेयजल की उपलब्धता को प्रभावित कर रही है।

बताया गया कि निवास के ग्राम थानमगांव, पायलीबाहुर, लौहारी के किसान लंबे समय से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थे, इस परियोजना के माध्यम से एक नई आशा की किरण देख रहे हैं। सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण यहां रबी की फसल का उत्पादन सीमित था और कई बार पीने के पानी के लिए भी ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ता था। इस परियोजना की शुरुआत से पहले प्रदान की टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया। वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर उन स्थानों की पहचान की गई जहां कन्टूर ट्रेंच का निर्माण सबसे अधिक प्रभावी साबित हो सकता था।

सामुदायिक सहभागिता सफलता का मूल मंत्र 

इस परियोजना की अद्वितीय सफलता का श्रेय स्थानीय समुदाय की सक्रिय और उत्साही भागीदारी को जाता है। स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और किसानों ने एकजुट होकर न केवल श्रमदान किया, बल्कि जल संरक्षण के महत्व को भी गहराई से आत्मसात किया। प्रदान की महिला कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जल संचयन, जल प्रबंधन और टिकाऊ खेती की तकनीकों के बारे में शिक्षित किया। इस सामुदायिक जुड़ाव ने परियोजना को स्वामित्व की भावना प्रदान की और इसकी दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित की।

यह मॉडल बनेगा प्रेरणा स्त्रोत 

निवास के ग्राम थानमगांव, पायलीबाहुर, लौहारी पंचायत में जल संरक्षण का यह मॉडल न केवल पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सामुदायिक सहभागिता और वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है। नाबार्ड और प्रदान के इस संयुक्त प्रयास से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी उपलब्ध होगा, पेयजल की समस्या कम होगी और अंतत: उनकी आजीविका में सुधार आएगा। यह परियोजना अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन सकती है, जहां जल संरक्षण और सामुदायिक विकास की आवश्यकता है।

इनका कहना है

थनमगांव पंचायत में जो कार्य हुआ है, वह वास्तव में जल संरक्षण के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में स्थापित किया जा सकता है। कन्टूर ट्रेंच के निर्माण से क्षेत्र के जल स्तर में निश्चित रूप से सुधार होगा। प्रदान द्वारा जिस तरह से समुदाय को साथ लेकर यह कार्य किया गया, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। भविष्य में हम इस सफल मॉडल को जिले की अन्य पंचायतों में भी दोहराने की योजना बना रहे हैं।


देवव्रत पाल, डीडीएम नाबार्ड

हमने प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि कन्टूर ट्रेंच तकनीक न केवल भूजल स्तर को बेहतर करती है, बल्कि यह वर्षा जल को जमीन में रोकने में भी सहायक है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है। इस वर्ष पहली बारिश के बाद ही ट्रेंच में पानी भरा हुआ दिखाई दिया, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र के जल स्तर में बहुत जल्द सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।


अनुरुद्ध शास्त्री, प्रदान संस्था



 

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