पीला सोना की महक इस वर्ष जंगलों से हुई गायब

पीला सोना की महक इस वर्ष जंगलों से हुई गायब

  • मौसम की बेरूखी से ग्रामीणों में निराशा
  • ग्रामीणों की अतिरिक्त आय पर लगा ग्रहण

मंडला महावीर न्यूज 29. गर्मी का सीजन शुरू होते ही आदिवासी ग्रामीण, वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण महुआ बीनने में व्यस्त हो जाते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों महुआ बीनने का कार्य प्रगति रहता था, लोग भोर होते ही उठकर महुआ पेड़ों के नीचे पहुंच जाते थे, जिससे महुआ पेड़ से गिरे हुए फूल को मवेशी ना खाएं। क्षेत्र में महुआ एक अतिरिक्त आमदनी का साधन है, लोग कच्चा महुआ बीनकर उसे धूप में सुखाते है, उसके बाद बाजार में ले जाकर विक्रय करते है, यह महुआ ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का साधन है। जिससे ग्रामीणों को इस पीला सोना के संग्रहण से आर्थिक मदद मिलती है। लेकिन इस वर्ष ग्रामीणों की अतिरिक्त आय पर ग्रहण लग गया।

मौसम की बेरूखी का असर महुआ संग्राहकों की अतिरिक्त आय पर हुआ है। जिले के वनांचल, ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों महुआ संग्राहक परिवार की उम्मीदें इस बार बेमौसम बारिश ने पानी फेर दिया है। मार्च अप्रैल माह में पीला सोना कहां जाने वाले महुएं की खुशबू जंगलों से गायब रही। मार्च और अप्रैल माह में कुछ महुआ संग्राहकों ने महुआ का संग्रहण किया था, लेकिन महुआ गर्मी बढऩे के साथ अप्रैल माह में अपने पूरे शबाव पर रहता है और महुआ संग्राहकों का डेरा जंगलों में अल सुबह से हो जाता है, लेकिन इस बार मौसम के बिगडैल मिजाज ने महुआ संग्राहकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बारिश और ओले ने महुआ फूल को नष्ट कर दिया है। जिससे इस बार महुआ संग्राहकों की अतिरिक्त पर विराम लग गया।

बेमौसम बारिश ने महुआ का बिगाड़ दिया गणित 

जानकारी अनुसार मार्च के पहले सप्ताह से शुरु होकर अप्रैल अंतिम सप्ताह तक झरने वाले महुआ के फूल पर इस बार मौसम का ग्रहण लग गया। हर साल की भांति फूल गिरना शुरू हुआ था, लेकिन बारिश ने इस पर ब्रेक लगा दी। बताया गया कि मार्च के अंतिम सप्ताह व अप्रैल के दूसरे सप्ताह के बीच महुआ फूल की बंफर बरसात होती है, पर इस बीच बेमौसम बारिश व ओले ने महुआ का सारा गणित बिगाड़ दिया। मार्च के बाद से लगातार रुक रुक कर बारिश तो कहीं-कहीं ओले भी गिरे, वन क्षेत्र में जमकर आंधियां चली। आंधी से महुआ फूल गिरकर बेकार हो गए तो तापमान में गिरावट के कारण अपरिपक्व फूल में सडऩ भी आ गई। बताया गया कि मौसम की बेरूखी के कारण महुआ के पेड़ों में सुरक्षित फूल की खुशबू इस वर्ष जंगलों में महक नहीं बिखेर सकी।

कम मात्रा में हुआ महुआ का संग्रहण 

बताया गया कि जिले के वनांचल क्षेत्र में हुई बारिश और उसके बाद बीच बीच में गरज चमक व तेज हवाओं के चलने से वनोपज को भारी नुकसान हुआ है। वनोपज के बारिश की भेंट चढ़ जाने से इस बार वनांचल क्षेत्रों के गरीब आदिवासियों की आय का मुख्य स्त्रोत महुआ प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ चुका है। बता दे कि तेज गरज, चमक के साथ हुई बारिश के साथ जिले से महुआ की वनोपज को नुकसान पहुंचा है और कम मात्रा में महुआ का संग्रहण किया गया है। वनांचल क्षेत्र के आदिवासी परिवारों के लिए आय के मुख्य स्त्रोत की वनोपज महुआ की फसल हुआ करती है, लेकिन इस बार प्राकृतिक आपदा ने उनके वनोपज संग्रहण पर पानी फे र दिया है। वनांचल क्षेत्र के आदिवासियों की आय का मुख्य साधन वनोपज है। ग्रामीणों ने बताया कि वनोपज हमारे क्षेत्र के लोगों की मुख्य आय का साधन होता है। वनोपज हमारा आय के लिए अतिरिक्त सहारा है।

मौसम की नमी से महुआ हुआ प्रभावित 

ग्रामीणों ने बताया कि इस साल मौसम साथ नहीं दिया। जनवरी फरवरी से ही मौसम का रुख बिगड़ा हुआ था। जिसके कारण जिले में महुआ की फसल प्रभावित हुई। मौसम में नमी आने के कारण महुआ पेड़ों से कम ही गिरे। जिसके कारण महुआ के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। ग्रामीणों ने बताया कि जैसे- जैसे गर्मी अधिक पड़ती है, वैसे वैसे महुआ की फसल भी अच्छी होती है, लेकिन इस बार खराब मौसम से हालत बिल्कुल विपरीत रहे। इससे ग्रामीण आदिवासी परिवार के लोगों के चेहरों में परेशानी झलक रही है। इस वर्ष बारिश के चलते फसल पिछले सालों के मुकाबले काफी कम है। उत्पादन कम होने के महुआ के दामों में बढ़ोतरी रहेगी, लेकिन महुआ अधिक मात्रा में आदिवासियों के पास नहीं रहेगा।

पशुओं के लिए है पौष्टिक आहार 

महुए के फूल रसीले और मीठे होते हैं। इनको चूसने के लिए कीट-पतंगों में जबरदस्त होड़ लगी रहती है। गरीब तबके के लोगों को महुआ से सालभर ईंधन के लिए जलाऊ लकड़ी मिल जाती है। इसकी छाल, फल व फूल में औषधिय गुण होने से इनका उपयोग आयुर्वेदिक उपचार में भी किया जाता है। इसकी पत्तियां व फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, इसलिए ये पशुओं के लिए बेहतरीन पौष्टिक आहार होते हैं। इनको खिलाने से पशु में दूध की गुणवता व मात्रा दोनों में ही बढ़त होती है। इसकी मजबूत लकड़ी घर के दरवाजे, फर्नीचर आदि बनाने के काम आती है। ग्रामीणों को सालभर महुआ के पेड़ों से अतिरिक्त आय होती है।

औषधीय गुणों से भरपूर है महुआ 

बुजूर्गो का कहना है कि महुआ में औषधीय गुण भी होते है। पूर्व से ही आयुर्वेद में महुआ का उपयोग अनेक प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है। महुआ में प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट्स जैसे पोषक तत्व के साथ इसमें कई अन्य तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर को अलग-अलग प्रकार से लाभ प्रदान करते हैं।



 

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