चार माह में 41 हजार 545 जांचे, मिला एक मलेरिया पॉजिटिव

विश्व मलेरिया दिवस

चार माह में 41 हजार 545 जांचे, मिला एक मलेरिया पॉजिटिव

  • विगत वर्ष थे 175 मलेरिया पॉजीटिव
  • ढाई लाख दवायुक्त मच्छरदानी की गई थी वितरित

मंडला महावीर न्यूज 29. साल दर साल जिले में मलेरिया पॉजिटिव की संख्या घट रही है। जिसका कारण तत्वरित जांच है। जांच की सुविधा और सभी स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्य केन्द्र, आरोग्य केन्द्रों में उपलब्ध करा दी गई है। पिछले वर्ष 2024 में जहां 175 मरीज मिले थे वहीं इस वर्ष चार माह में सिर्फ एक ही मरीज सामने आया हैं और जो मरीज सामने आया हैं वह भी बाहर काम से लौटा मरीज हैं। जिला मलेरिया अधिकारी राम शंकर साहू ने बताया कि विगत वर्ष 2024 में मलेरिया के फैलाव को रोकने के लिए जिले के हाईरिस्क 460 ग्रामों में 2 लाख 50 हजार 250 दवायुक्त मच्छरदानी का वितरण भी किया गया था। लगातार कम हो रहे मरीजों से विभाग ने भी राहत की सांस ली। भले जिले के लोग मलेरिया से ग्रसित नहीं हो रहे हों लेकिन बाहर काम में जाने वाले श्रमिकों को लेकर भी विभाग गंभीर नजर आ रहा है।


जिला मलेरिया अधिकारी राम शंकर साहू ने बताया कि सभी ब्लॉक स्तर पर बाहर काम में जाने वाले मजदूरों की जानकारी एकत्रित की जा रही है और फॉलोअप लिया जा रहा है कि कब गए हैं और कब लौटेंगे। इसके लिए गांव में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, एमपीडब्ल्यू कार्य कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों में एक डायरी बनाई जा रही है जिसमें पलायन करने वाले श्रमिकों की जानकारी होती है। जैसे ही श्रमिक गांव पहुंचते हैं तत्काल उनके सैंपल लिए जाते हैं। बताया गया कि इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक मलेरिया की 41 हजार 545 जांचे की गई है। जिसमें एक पॉजीटिव मिला है, जो पलायन से वापस लौटा है।

आधे घंटे में मिल जाती है रिपोर्ट 

पॉजिटिव व नेगेटिव रिपोर्ट पालने के लिए अब मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। पैराचेक कीट से आधा घंटे में ही रिपोर्ट मरीजों को मिल जाती है यही कारण है कि समय पर उपचार मिलने से मलेरिया में लगातार नियंत्रित हो रहा है। पूर्व में स्लाइड के माध्यम से सैंपल लिए जाते थे जिनकी लैब में जांच के बाद रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग जाते थे। अब मौके पर ही रिपोर्ट दे दी जाती है। इसके लिए लैब टेक्नीशियन की आवश्यकता भी नहीं है। आशा कार्यकर्ता ही मरीजों के सैंपल लेकर जांच कर सकारात्मक व नकारात्मक परिणामों की जानकारी दे देती है। मलेरिया निकलने पर तीन या अधिक गंभीर होने पर 14 दिन की दवाई दी जाती है। जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में जांच की सुविधा निशुल्क है।

10 साल में आ रहा बेहतर परिणाम

कागजों में दर्ज सरकारी आंकड़े की माने तो 41 हजार से अधिक जांच के बाद जिले में पलायन से लौटा एक व्यक्ति मलेरिया पॉजीटिव मिला है। पॉजीटिव मरीज जिले से बाहर काम के लिए गया हुआ था जो वापस अपने ग्राम लौटा है, जिसके बाद जांच में पॉजीटिव पाया गया। वर्ष 2015 में जिले में 4592 मलेरिया पॉजिटिव पाये गए थे। इसके बाद से लगातार इनकी संख्या कम हो रही है। हलांकि अब मच्छरदानियों का वितरण भी बंद है। वर्ष 2021 से मलेरिया रोधी मच्छरदानी का वितरण नहीं हुआ है। 2019 में 2 लाख 5 हजार 250 मच्छर दानी 460 ग्रामो में बांटी गई थी, वहीं 2020 में एक लाख 30 हजार 317 ग्रामो में मच्छर दानी का वितरण किया। वर्ष 2024 में दो लाख 50 हजार 250 दवायुक्त मच्छरदानी का वितरण हुआ है।

ऐसे समझें लक्षण 

मलेरिया में व्यक्ति को ज्यादा देर तक बुखार आता है और यह बुखार प्रतिदिन तीन से चार घंटे तक रहता है। मलेरिया 10 से 12 दिन तक व्यक्ति को प्रभावित करता है। मलेरिया में तेज बुखार के साथ ठंड लगना, उल्टी, दस्त, तेज पसीना आना तथा शरीर का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ जाना, सिरदर्द, शरीर में जलन तथा मलेरिया होने के पश्चात रोगी के शरीर में कमजोरी महसूस होना आदि इसके लक्षण हैं। मलेरिया के बचाव के लिए अपने आसपास व घरों में साफ-सफाई रखें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना, घर में मौजूद पुराने बर्तनों, टायरों एवं खाली गमलों इत्यादि में पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी का उपयोग करना। मच्छरों से बचने के लिए पूरा प्रबंध करना चाहिए।

हानिकारक नहीं, बरतें सावधानी 

जिला मलेरिया अधिकारी राम शंकर साहू का कहना है कि इन बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने के साथ मच्छरों एवं अन्य जहरीले कीटों से सुरक्षा प्रदान करती है। साधारण मच्छरदानी की तुलना में दवायुक्त मच्छरदानी शरीर में स्पर्श होने पर कुछ समय के लिए चुनचुनाहट हो सकती है लेकिन यह किसी भी तरह से मनुष्य के लिए हानिकारक नहीं है और न ही इससे छोटे बच्चे को कोई नुकसान होता है। परिवार में छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, वृद्धजनों को यह मच्छरदानी आवश्यक रुप से उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इस्तेमाल के बाद कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी को ठीक से तह लगाकर साफ स्थान पर रखें। अत्यधिक गंदा होने पर कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी को सादे और साफ पानी में हल्की रगड़कर धोयें। हल्का धोने के बाद इसे छांव में सुखाएं। आग से दूर रखें एवं कटने, फटने व जलने से बचाएं। कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी को धूप में न सुखाएं। इसे धोने के लिए गर्म पानी अथवा ब्रश का इस्तेमाल न करें। इसे धोने के लिए पत्थर पर न पटकें। धोने के बाद न निचोंडें। कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी का उपयोग मछली पकडऩे के लिए न करें। कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी को न बेंचे और न की उपहार में दें। मच्छरदानी का उपयोग खाद्य सामग्री ढंकने, सुखाने जैसे अन्य कार्य में नहीं किया जाए।

इनका कहना है

लोगों की जागरूकता से अच्छे परिणाम आ रहे हैं। मलेरिया को जिले से खत्म करना है तो सभी लोगों का सहयोग चाहिए, कोई भी बुखार होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर मलेरिया की जांच कराएं, जो की पूरी तरह से निशुल्क है और रिपोर्ट के लिए अधिक इंतजार भी नहीं करना पड़ता।
राम शंकर साहू, जिला मलेरिया अधिकारी, मंडला



 

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