ग्रेच्युटी में सेवा अवधि की गणना में विसंगति, शिक्षकों का प्रदर्शन
- 26 साल की सेवा में 6 साल ही ग्रेच्युटी के लिए मान्य, सीएम के नाम दिया ज्ञापन
- ग्रेच्युटी में पूरी सेवा का लाभ न मिलने से शिक्षकों में आक्रोश
मंडला महावीर न्यूज 29. एनएम ओपीएस के राष्ट्रीय आह्वान पर मंगलवार को जिले के एनपीएस योजना से जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों ने बाहों में काली पट्टी बांधकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों ने जेल घाट से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर एनपीएस और यूपीएस योजनाओं का विरोध किया और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने की मांग की।
शिक्षकों ने ज्ञापन में कहा कि एनपीएस और यूपीएस दोनों ही योजनाएं कर्मचारी के अंशदान और शेयर बाजार पर आधारित हैं, इसलिए उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने यूपीएस को एनपीएस से बेहतर बताए जाने का भी विरोध किया और कहा कि यूपीएस में कर्मचारी के अंशदान को हड़पा जा रहा है और जमा राशि वापस नहीं मिलेगी। शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें न एनपीएस चाहिए और न यूपीएस, उन्हें सिर्फ ओपीएस चाहिए।
ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन की मंडला जिला इकाई के बैनर तले मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रेच्युटी के मुद्दे पर शिक्षकों के आक्रोश को उजागर किया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में अध्यापक संवर्ग से आए शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों को ग्रेच्युटी के भुगतान में सेवा अवधि की गणना शिक्षाकर्मी और संविदा शाला शिक्षक की प्रथम नियुक्ति दिनांक से न कर शैक्षणिक संवर्ग में आने की दिनांक जुलाई 2018 से की जा रही है। इस विसंगति के कारण 20 वर्ष से अधिक सेवा करने के बावजूद जुलाई 2023 से पहले सेवानिवृत्त या दिवंगत हुए शिक्षकों को एक रुपये की भी ग्रेच्युटी नहीं मिली है। वहीं, जुलाई 2023 के बाद सेवानिवृत्त शिक्षकों को, जिनकी सेवा 25 वर्ष से अधिक है, मात्र लाख-डेढ़ लाख रुपये ही ग्रेच्युटी का भुगतान हो रहा है।
शिक्षकों ने मांग की कि ग्रेच्युटी के भुगतान में सेवा अवधि की गणना शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक के पद पर प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए, क्योंकि पूर्व की सेवा नियमित सेवा रही है और यह वरिष्ठता, पदोन्नति और क्रमोन्नति के लिए मान्य है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान पद का वेतन भी पूर्व सेवाओं से जुड़ा हुआ है।
सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने उदाहरण देते हुए बताया कि प्राथमिक शिक्षक सतीश कुमार पटेल जिनकी सेवा 25 वर्ष थी, को मात्र 1,89,215 रुपये ग्रेच्युटी मिली, जबकि वे 9,72,750 रुपये के हकदार थे। इसी प्रकार माध्यमिक शिक्षक अरुणा मेहता जिनकी सेवा 26 वर्ष थी को 2 लाख 51 हजार 412 रुपये ग्रेच्युटी मिली, जबकि उन्हें पूरी सेवा का लाभ मिलने पर 10 लाख 89 हजार 452 रुपये का भुगतान होना था। उन्होंने स्व. उमा शंकर सिंगौर, प्राथमिक शिक्षक जिनकी 25 वर्ष की सेवा में मृत्यु हो गई का भी उदाहरण दिया, जिन्हें जुलाई 2018 से सेवा अवधि की गणना के कारण 5 वर्ष की सेवा में 5 दिन कम होने से एक रुपये भी ग्रेच्युटी नहीं मिली।
प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार के इस रवैये को दोगला बताते हुए कहा कि पंचायत विभाग के मूल कर्मचारियों को पूरी ग्रेच्युटी दी जा रही है, तो अध्यापकों की सेवा से परहेज क्यों किया जा रहा है, जबकि उनकी पूर्व की सेवा भी पंचायत के अधीन ही थी। ज्ञापन सौंपने के दौरान मीना साहू, सरिता सिंह, अर्चना गोमस्ता, संजू लता सिंगौर, कमोद पावले, अमर सिंह चंदेला, अभित गुप्ता, संजीव सोनी, शिव शंकर पांडे, उमेश यादव, लोक सिंह पदम, मंगल सिंह पंद्रे, संजीव दुबे, दिलीप मरावी, प्रदीप पटेल, ऊषा ठाकुर, यशवंत चंद्रोल, निर्मला यादव, मंजूषा चौरसिया, क्षमता रिछारिया, देवेंद्र कच्छवाहा, कोमल बघेल, संतोष टंडिया, रामकिशोर मरकाम, संगीता गुप्ता, पुष्पलता मरावी, नीलकांत अग्रवाल, राकेश हरदहा, विभा मिश्रा, प्रशांत श्रीवास्तव आदि ने सक्रिय सहयोग दिया।










