कान्हा में वन्यप्राणियों के लिएं 700 से अधिक जल स्त्रोत

कान्हा में वन्यप्राणियों के लिएं 700 से अधिक जल स्त्रोत

  • वन्य प्राणियों के लिए कान्हा प्रबंधन ने किए पेयजल के पुख्ता इंतजाम
  • बढ़ते तापमान को देखते जल स्त्रोतों पर रखी जा रही नजर

मंडला महावीर न्यूज 29. भीषण गर्मी की तपन से जहां आम जन का जीवन प्रभावित होता है, वहीं जंगलों के वन्य प्राणी भी इससे प्रभावित होते है। इस बार अनुमान लगाया जा रहा हैं कि तापमान 45 डिग्री के पार हो सकता है। इस तपन भरी गर्मी में इंसान तो पानी से अपनी प्यास बुझा ही सकता हैं लेकिन कान्हा के वन्य जीवों के लिए भी कान्हा प्रबंधन ने पेयजल के पुख्ता इंतजाम कर रखे है। गर्मी के सीजन में कान्हा पार्क के अंदर विभिन्न वन्यप्राणी, जीव विचरण करते है। इनके पेयजल के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई है।

फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि वन्य प्राणी प्रबंधन की दृष्टि से हर चार स्क्वयर किमी में एक जल स्त्रोतों वन क्षेत्र में होना चाहिए, जिसको देखते हुए कान्हा पार्क के वन क्षेत्र में करीब 700 जल स्त्रोत उपलब्ध है। कान्हा पार्क करीब 2200 स्क्वयर किमी में फैला हुआ है। इस हिसाब से कान्हा में वन्य प्राणियों के लिए पर्याप्त जल स्त्रोत है। जहां जल स्त्रोत नहीं है, वहां कृत्रिम जल स्त्रोत निर्माण कराया गया है, जिसमें तालाब या सोसर बनाए गए है। वहीं गर्मी के सीजन में इन कृत्रिम जल स्त्रोंतों में टेंकरों के माध्यम से पानी की पूर्ति की जाती है। फिलहाल कान्हा प्रबंधन के पास पर्याप्त पानी के टेंकर उपलब्ध है। जिसके कारण इस वर्ष गर्मी के सीजन में वन्य प्राणियों को पानी की कमी नहीं होगी।

जानकारी अनुसार वन्य प्राणियों के लिए लगातार कान्हा प्रबंधन और संबंधित अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा मॉनिटरिंग करता है। प्रत्येक सप्ताह जल स्रोतों को देखा जा रहा है। जिन जल स्त्रोंतों में पानी कम है, या पानी में कचरा, सूखे पत्ते पड़े है, उन्हें अलग करके साफ किया जा रहा है। बताया गया कि कान्हा के जल स्रोत प्राकृतिक हैं जहां कुछ टाइगर्स गर्मी के सीजन में अठखेलियाँ भी करते नजर भी आते हैं। वही कान्हा के जंगल में कृत्रिम रूप से तैयार किये गये जल स्रोतों में भी टाइगर्स समेत अन्य वन्य प्राणी अपनी प्यास बुझाने आते हैं। इस दृश्य को कान्हा की सफारी के दौरान पर्यटकों द्वारा प्रतिवर्ष देखा जाता है, जिसे पर्यटक अपने कैमरे में कैद किये बिना नहीं रहते है।

कान्हा पार्क में पर्याप्त है जल स्त्रोत 

कान्हा पार्क प्रबंधन ने बताया कि कान्हा नेशनल पार्क के कोर और बफर जोन में 700 से अधिक जल स्त्रोत है। जिसमें बफर जोन के करीब 173 जल स्त्रोत स्थित है। इन सभी जल स्त्रोतों में वन्य प्राणियों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। वहीं कोर जोन में करीब 90 तालाब से ऊपर, करीब 70 वॉटर होल्स और एक सैकड़ा से अधिक बारहमासी नदी, नाले मौजूद है। जिसमें अभी वन्यप्राणियों के लिए पर्याप्त पानी है। जिसके कारण इस गर्मी के सीजन में वन्य प्राणियों को जंगल से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। फिलहाल जल स्त्रोंतों की सफाई लगातार की जा रही है, जो पूरी इस गर्मी के सीजन में वन कर्मियों द्वारा इन जल स्त्रोतों पर नजर बनाए रखेंगे।

अधिकारी कर रहे वन क्षेत्र का भ्रमण 

कान्हा पार्क प्रबंधन ने बताया कि इस गर्मी के सीजन में कान्हा के वन क्षेत्रों में प्रतिदिन गश्ती और भ्रमण कर यहां के जल स्त्रोतों के साथ अन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। बताया गया कि कान्हा नेशनल पार्क के वनक्षेत्र कान्हा, किसली, मुक्की, सूपखार, भैसानघाट, सरही, फैन, खटिया, सिझौरा, मोतीनाला, गढ़ी, खापा, समनापुर परिक्षेत्र में स्थित जल स्त्रोंतो पर अधिकारी, कर्मचारियों की नजर है।

वन कर्मी कर रहे जल स्त्रोंतो की सफाई 

कान्हा नेशनल पार्क के वनक्षेत्र में वन्यप्राणियों के लिए सैकड़ों कृत्रिम ओर प्राकृतिक जल स्त्रोंत है। वन परिक्षेत्र के जंगल में स्थित जल स्त्रोंतो पर वन अमले द्वारा नजर रखी जा रही है। गर्मी के सीजन में वृक्षों के पत्तें झड़ते है, जो जल स्त्रोंतो में गिर जाते है। प्रतिदिन जंगल के जल स्त्रोंंतो की सफाई तैनात दल द्वारा की जा रही है। जल स्त्रोंतों को बारीकी से भी देखा जाता है। जिससे कहीं शिकारियों ने जल स्त्रोंतो में वन्य प्राणियों के शिकार के लिए कोई जहरील चीज ना मिलाई हो। इसके साथ ही जिन जल स्त्रोंतों में पानी कम है, उन जल स्त्रोंतों में पानी का भराव भी कराया जा रहा है। जिससे वन्य प्राणियों को इस भीषण गर्मी में पेयजल के लिए जंगल से बाहर ना जाना पड़े। कान्हा पार्क में तैनात वन अमला सभी दृष्टिकोण से चौकन्ने है, जिससे कान्हा के वन्य प्राणी इस गर्मी के सीजन में सुरक्षित रह सके।

पानी की तलाश में वन्य प्राणी पहुंच जाते हैं रहवासी क्षेत्र

बताया गया कि गर्मी के सीजन में कई बार वन्य प्राणी पानी की तालाश में भटकते हुए जंगल से बाहर निकल कर रहवासी क्षेत्र में पहुंचते है, जो वन्य प्राणी रहवासी क्षेत्र में पहुंचते है, उनको वन क्षेत्र में पानी आसानी से नहीं मिल पाता है। इन वन्य प्राणियों के जंगल से बाहर आने पर इनके शिकार की संभावना भी बढ़ जाती है। अधिकत्तर चीतल, हिरण आवारा श्वानों का शिकार भी हो जाते है। इन्हीं सब बातों का ध्यान रखते हुए कान्हा पार्क प्रबंधन का प्रयास रहता है कि पार्क के अंदर जहां प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी है, वहां कृत्रिम रूप से जल स्रोतों के निर्माण कराकर वन्य जीवों को पानी उपलब्ध कराया जाए।

वन्य प्राणियों के लिए कृत्रिम और प्राकृतिक जल स्त्रोत 

बताया गया कि भीषण गर्मी को देखते हुए कान्हा पार्क प्रबंधन ने वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की उपलब्धता आसानी हो इसके लिए कान्हा के वन परिक्षेत्र में जल स्त्रोंतों के पुख्ता इंतजाम कर रखे है। कान्हा पार्क क्षेत्रांतर्गत बड़ी संख्या में प्राकृतिक जल स्रोत हैं लेकिन सभी वन्य जीवों को आसानी से पानी उपलब्ध हो जाए, इसके लिए बड़ी संख्या में कृत्रिम जल स्रोतों का निर्माण भी कराया गया है। प्रबंधन द्वारा इन जल स्रोतों की साफ-सफाई समय समय पर कराई जाती है। कान्हा नेशनल पार्क के अंदर बड़ी संख्या में प्राकृतिक जल स्रोत हैं जिनमें नदी, नाले, छोटी नदियां, झिरिया शामिल हैं लेकिन पार्क का विशाल क्षेत्र और यहां पाए जाने वाले हजारों प्रजातियों के वन्य जीवों को आसानी से पेयजल मिल सके इसके लिए पार्क प्रबंधन द्वारा कृत्रिम रूप सैकड़ों जल स्त्रोंतों की व्यवस्था की है। जिसकी मॉनीटरिंग भी समय समय पर की जा रही है।




 

Leave a Comment