कोदो-कुटकी में फंगल संदूषण से उत्पन्न खाद्य सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा
- नेटवर्क फॉर कंजर्विंग सेंट्रल इंडिया का चौथा एग्रोबायोडायवर्सिटी राउंडटेबल आयोजित
मंडला महावीर न्यूज 29. कान्हा परिदृश्य में जहाँ सूखा-प्रतिरोधी छोटे बाजरे जैसे कोदो और कुटकी आज भी सामाजिक और कृषि महत्व रखते हैं, नेटवर्क फॉर कंजर्विंग सेंट्रल इंडिया ने अपना चौथा एग्रोबायोडायवर्सिटी राउंडटेबल एमपीटी जंगल रिज़ॉर्ट, सरही गेट, कान्हा टाइगर रिज़र्व में आयोजित किया। इस कार्यक्रम में नागरिक समाज संगठनों, किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों, अनुसंधान संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों के विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाया गया जिससे परिदृश्य-आधारित कोदो-कुटकी लेबल विकसित करने, खाद्य सुरक्षा उपायों में सुधार और पारंपरिक ज्ञान को कोदो-कुटकी संरक्षण और खाद्य सुरक्षा विज्ञान में एकीकृत करने पर चर्चा की जा सके।
जानकारी अनुसार यह राउंडटेबल अगस्त 2023, जनवरी 2024 और अगस्त 2024 में आयोजित पिछले सत्रों से प्राप्त अंतर्दृष्टियों और कार्य योजनाओं पर आधारित था। प्रमुख विषयों में मिलेट्स के पोषण, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने वाली विपणन रणनीतियाँ और कोदो-कुटकी में फंगल संदूषण से संबंधित खाद्य सुरक्षा चुनौतियाँ शामिल थीं। चर्चा में भाग लेने वाले संगठनों में कीस्टोन फाउंडेशन, एमएसएसआरएफ, पैगाम, पीआरएडीएएन, कोको राइट बेकरी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, समर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट, अर्थ फोकस फाउंडेशन, रिलायंस फाउंडेशन, नर्मदा सेल्फ रिलायंट फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी, परसटोला स्व-सहायता समूह, ग्रामोदय छत्तीसगढ़, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, बालाघाट सामुदायिक विकास केंद्र और राष्ट्रीय महिला, बाल और युवा विकास संस्थान शामिल थे।
राउंडटेबल में ग्राम कोको आकर्षण का केन्द्र
मंडला जिले के बिछिया तहसील में स्थित कोको राइट बेकरी और प्रसंस्करण इकाई संचालित है, जो मिलेट आधारित मूल्यवर्धित उत्पाद कुकीज का उत्पादन करती है। जिसका संचालन एक महिला जमीला बेगम द्वारा किया जा रहा है। इस इकाई के संचालन में जमीला की चुनौतियों पर विचार विमर्श किया गया। जिसमें पारंपरिक कोदो-कुटकी को संरक्षित करते हुए स्थायी आजीविका उत्पन्न करने के प्रयास शामिल थे। इसके बाद बोडला तहसील, कबीरधाम जिले, छत्तीसगढ़ में स्थित धवाइपानी प्रसंस्करण मिल और बीज बैंक पर चर्चा की गई। जिसका संचालन ग्रामोदय छत्तीसगढ़ के निदेशक चंद्रकांत यादव द्वारा किया गया। राउंडटेबल में समुदाय संचालित मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा नेतृत्व किए गए बीज संरक्षण और कोदो-कुटकी प्रसंस्करण के प्रयासों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
खाद्य सुरक्षा चुनौतियों पर की चर्चा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शोधकर्ता डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि हमें कोदो-कुटकी पुनर्जीवन में महिलाओं और उनके प्रयासों को केंद्र में रखना चाहिए। डॉ. चौधरी और एमएसएसआरएफ के डॉ. जेगन शेखर ने कोदो-कुटकी में फंगल संदूषण से उत्पन्न खाद्य सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की। कीस्टोन फाउंडेशन की निदेशक डॉ. अनीता वर्गीस ने नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर लास्टफॉरेस्ट एंटरप्राइजेज और आधिमालाई ब्रांड्स की स्थापना के अनुभव से मूल्यवान सबक साझा किए। उन्होंने एक 30 वर्षीय उद्यम की कहानी साझा की जो लगभग 2 हजार किसान शेयरधारकों को विविध बाजारों से जोड़ता है और स्थानीय समुदायों में गर्व की भावना को बढ़ावा देता है।
अगला राउंडटेबल सितंबर में होगा आयोजित
चौथा एग्रोबायोडायवर्सिटी राउंडटेबल में प्रतिभागियों ने परिदृश्य लेबल के लिए अगले कदमों को भी चिह्नित किया, जिसमें क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को समझने के लिए मानचित्रण अभ्यास, सीखे गए सबक को लागू करने के लिए स्थापित उद्यमों का दौरा और विपणन मॉडलों पर गहन अनुसंधान शामिल किया गया, जो कान्हा परिदृश्य में अनुकूलित किए जा सकते हैं। अगला राउंडटेबल सितंबर 2025 में निर्धारित किया गया है, जो लेबल विकास पहलों की प्रगति का मूल्यांकन और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन में पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक प्रयासों के संश्लेषण पर केंद्रित होगा।












