- मालिक बनने के चक्कर में किरायेदार दुकान नहीं कर रहा खाली
- नगर पालिका सहयोग कर नई प्रथा कर रही चालू
विगत लंबे समय से मण्डला नगर पालिका परिषद दुकानों की लीज का रिन्यूवल नहीं कर रही है बल्कि जो दुकाने किराये से चल रही हैं उन दुकानों के स्वामित्तवों पर कार्यवाही भी नहीं कर रही है। बल्कि सांठ गांठ से एक नई प्रथा का आगाज कर रही है। जो दुकाने किराये से दी गई है उन किरायेदारों को मालिक बनाया जा रहा है। जबकि यह नियम विरूद्ध काम है। फिर भी नगर पालिका परिषद इस काम को अंजाम देने काम कर रही है। पट्टेधारी की नहीं हो रही सुनवाई बल्कि कब्जेधारी को सहयोग कर रही है। जो मामला न्यायालय में विचाराधीन है उस मामले को पीआईसी की बैठक में रखने की तैयारी कर सूचना जारी कर दी है। पीआईसी की बैठक में 11 बिंदु पर चर्चा की जानी है जिसमें प्रस्ताव क्रमांक 2 विवादित है और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है फिर भी इस प्रस्ताव को इस बैठक में रखने का निर्णय लिया है।
मंडला महावीर न्यूज 29. नगर में विकास कार्य और नागरिकों को बेहतर सुविधा मुहैया कराना तो दर किनार किया, लेकिन अवैध कब्जेधारियों और अतिक्रमणकारियों को सहयोग कर राजस्व को क्षति पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। नगर पालिका मण्डला में न तो न्यायालय की बात रखी जाती और न ही भू-स्वामी व पट्टेधारी की मदद की जाती। जबकि वह समय पर टेक्स या किराया जमा कर रहे हैं। पीआईसी की बैठक में पहले चर्चा कर प्रस्ताव लाया जाता है कि जो विषय न्यायालय में विचाराधीन है उसका निर्णय नहीं लिया जा सकता, वहीं जब फिर से पीआईसी की बैठक होती है तो न्यायालय में चल रहे प्रकरण को दर किनार कर अपना फैसला लेने की तैयारी नगर पालिका परिषद कर रहा है। धन के लालच में राजस्व विभाग में बैठे एक कर्मचारी नपा अधिकारी को ईशारा कर देते हैं तो ये न्यायालय के फैसले की भी परवाह किये बिना ऐसे कब्जेधारी का सहयोग करने तैयार हो जाते हैं जिसके पास पट्टा भी नही है।
तत्कालीन सीएमओ के आदेश का नहीं हुआ पालन
नगर पालिका परिषद मण्डला में पदस्थ तत्कालीन सीएमओ ने पट्टेधारी के पक्ष में निर्णय लेते हुए दुकान खाली कराने के लिए आदेश जारी किया था, लेकिन उनके आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया? जबकि नगर पालिका के पास अधिकार हैं। तत्कालीन सीएमओ ने उस दौरान आदेश जारी किया था जिसमें उल्लेख किया था कि संदर्भित आवेदन में जवाहरगंज बाजार श्रीराम वाचनालय के सामने भूखंड क्रमांक 419ए, 419बी एवं 420 में निर्मित दुकान जो नगर पालिका अभिलेख में किरायेदार मदन चौरसिया पिता स्व. गिरजाशंकर चौरसिया के नाम से आवंटित है। इस निकाय में शपथ पत्र प्रस्तुत कर लेख किया गया है कि आपके साथ साझेदारी के रूप में व्यवसाय कर रहे थे। जिसका प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है तथा प्रकरण में निराकरण होने तक उक्त दुकानों का आधिपत्य नगर पालिका में लेकर न्यायालय के निर्णय अनुसार दुकान का आधिपत्य सौंपने सौंपने निवेदन किया गया है। चूंकि प्रीतम गिदवानी उक्त दुकान पर अनाधिकृत रूप से कांबिज हैं, जो म.प्र.न.पा. अधिनियम की धारा 1961 की धारा 223 का उल्लंघन है। आपको इस पत्र के माध्यम से सूचित किया जाता है पत्र प्राप्ति से 03 दिवस के अंदर दुकान का रिक्त आधिपत्य नगर पालिका परिषद मण्डला को सौंपना सुनिश्चित करें। अन्यथा ऐसा न करने पर इस निकाय द्वारा दुकान का रिक्त आधिपत्य लेने की कार्यवाही की जावेगी। जो अभी तक नहीं की गई।
पीडि़त अनावेदक की मदद बन गई मुसीबत
पीडि़त ने बताया कि प्रीतम गिदवानी को व्यवसाय के लिए दुकान नहीं दी गई है। वास्तव में अगस्त सितम्बर 2000 में इसके गंभीर रूप से अस्वस्थ्य होने एवं पारिवारिक परेशानियां के कारण पट्टेधारी द्वारा दुकान संचालन संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसी स्थिति में दुकान का मात्र संचालन एवं प्रबंध के आशय से प्रीतम गिदवानी को दिया गया था। उक्त दुकान में प्रीतम गिदवानी का कोई स्वतंत्र हक व अधिकार नही है, वरन् यह अनावेदक की दुकान को ही आवेदक की ओर से व्यवस्थित करके चला रहा है, जिस के लिए यह अनावेदक उससे लाभांश प्राप्त करता है। उक्त दुकान मात्र 3 वर्षों के लिए प्रीतम गिदवानी को प्रबंध में सौपी गयी थी, लेकिन विभिन्न बहानों से वह अवधि बढ़ाता रहा है एवं अभी उससे दुकान छोडने की बात कह रहे हैं तो वह दुकान नहीं छोड़ रहा है। बल्कि अनावेदक ने पट्टेधारी के विरूद्ध उल्टा न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी मण्डला के समक्ष धारा 145 द.प्र.सं. का आवेदन प्रस्तुत कर दिया। पीडि़त का कहना है कि इंसानियत के नाते मदत की जिसका यह परिणाम निकलना कि मेरे द्वारा मदद करना मेरे लिए मुसीबत बन गई।
राजस्व का हो रहा नुकसान भरपाई करेगा कौन?
नगर पालिका के जिम्मेदारों द्वारा एक कब्जाधारी व्यक्ति को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का आरोप पीडि़त द्वारा लगाया गया है। बिंझिया निवासी नितिन चौरसिया ने बताया कि उनकी दुकान पर अन्य व्यक्ति द्वारा जबरन कब्जा कर लिया गया है, जिसकी शिकायत नपा के अधिकारियों से की गई लेकिन कब्जा तो नहीं हटाया गया बल्कि जिम्मेदारों ने कब्जाधारी व्यक्ति से ही दुकान का किराया वसूलने की तैयारी की जा रही है। पीडि़त ने बताया कि कुछ सालों पहले नगरपालिका द्वारा मेरे पिता मदन चौरसिया निवासी बिंझिया के नाम पर पट्टे में दुकानें दी गई थी, पीडि़त की दुकान पर कथित रूप से प्रीतम गिदवानी द्वारा कब्जा कर लिया गया तो पीडि़त ने मामला न्यायालय में पेश कर दिया। पीडि़त का आरोप है कि नगरपालिका द्वारा पिछले कुछ सालों से उनसे दुकान का किराया नहीं लिया जा रहा है, जिस पर नगर पालिका के जिम्मेदारों का कहना है कि चूंकि मामला न्यायालय में चल रहा है इसलिए किराया नहीं लिया जा सकता है, वहीं किराया न लेने से नगर पालिका का लाखों रुपये की राजस्व को हानि हुई इसका जिम्मेदार कौन है?
न पट्टेधारी से ले रहे किराया और न कब्जेधारी से
पीडि़त पट्टेधारी ने बताया कि वर्षों से नगर पालिका के द्वारा पट्टा आवंटित कर किराया मुझसे लिया जा रहा था और अचानक मुझसे किराया न लेकर कब्जेधारी से किराया लेने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई है कि कब्जेधारी द्वारा सबको नजराना देकर सेट कर लिया गया है। इसलिए न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण को पीआईसी की बैठक में रखे जाने की सूचना जारी की गई है। नगर पालिका के द्वारा निर्धारित किये गये वकील का दोहरा चेहरा भी सामने आया कि जब पीडि़त ने सवाल किया कि पट्टेधारी ने नगर पालिका को किराया देने की बात कही तो नगर पालिका के अधिकारी एवं निर्धारित वकील ने कहा कि न्यायालय में मामला विचाराधीन है इसलिए वर्तमान में किराया पट्टेधारी से नहीं लिया जा सकता है। अब सवाल ये उठता है कि पट्टेधारी से किराया नहीं क्यों नहीं लिया जा रहा है? पट्टेधारी से किराया न लेकर नगर पालिका राजस्व को नुकसान पहुंचा रही है, वहीं कब्जेधारी को सपोर्ट कर पट्टेधारी की बजाय किरायेदार को मालिक बनाने की नई प्रथा प्रारंभ की जा रही है। यदि यह प्रथा प्रारंभ हुई तो नगर पालिका क्षेत्र में विवादस्पद स्थिति निर्मित होगी और आगे फिर कोई भी दुकानदार बेरोजगारों को दुकानों किराये से देने में कतरायेंगे। जबकि शासन ने पट्टा मदन चौरसिया के नाम से जारी किया है।
पीडि़त ने लगाई गुहार कब्जेधारी से मुक्त करायें दुकान
बिंझिया निवासी नितिन चौरसिया ने नगर पालिका के अधिकारी एवं अध्यक्ष से गुहार लगाई कि पट्टा मदन चौरसिया के नाम से है और दुकान में जबरन कब्जा प्रीतम गिदवानी ने कर लिया है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि नगर पालिका के अधिकारी को निर्देश दिये जायें कि जिसके नाम से पट्टा जारी हुआ है। पीडि़त ने आरोप लगाया है कि भारी रकम का लेन-देन कर विभाग के लोग कब्जेधारी का सहयोग कर रहे हैं। पीडि़त को यह चिंता सता रही है कि नपा द्वारा कब्जेधारी से किराया लेने की तैयारी की जा रही है जिससे सरकारी दस्तावेजों में नाम चढ़ जाएगा तो पट्टेधारी को अपनी दुकान वापिस मिलने में और परेशानी बढ़ जाएगी। पीडि़त ने जिला प्रशासन से अपेक्षा की है कि जब तक मामला न्यायालय में विचाराधीन है और दोनों पक्षों की सुनवाई चल रही है जब तक न्यायालय से फैसला नहीं आ जाता तब तक कब्जेधारी से किराया न लिया जाये, वहीं दुकान खाली कराई जाये।
इनका कहना
पट्टेधारी के पास यदि कोई दस्तावेज हैं तो नगर पालिका परिषद में उपस्थित होकर उपलब्ध करायें उन दस्तावेजों की जांच कर निर्णय लिया जायेगा।
गजानंद नाफड़े, सीएमओ
नगर पालिका परिषद मण्डला
मेरे द्वारा नगर पालिका अध्यक्ष एवं नगर पालिका अधिकारी को इस विषय पर लिखित सूचना दी है। समस्त जानकारी के साथ दस्तावेज डिस्पेच शाखा में दिया हूॅ जिसकी रिसीव कापी मेरे पास है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी मामले की जांच करें वहीं यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जब तक न्यायालय का निर्णय नहीं आ जाता तब तक इस विषय को परिषद की किसी भी बैठक में न रखा जाये और न ही कब्जेधारी को सहयोग किया जाये।
नितिन चौरसिया, पट्टाधारी
निवासी मण्डला









