- काली माता मंदिर की आस्था दूर-दूर तक प्रचलित
- माता का दरबार रहस्यमई से परिपूर्ण
- माता काली के साथ सिद्ध बाबा दरबार और शनि धाम का है दरबार
मंडला महावीर न्यूज 29. शारदेय नवरात्रि का पर्व में घरों से लेकर मंदिरों और पंडालो पर आस्था की धूम मची है। लोग अपनी-अपनी मान्यताओं और मन्नत के अनुसार शारदेय नवरात्रि के महापर्व को मनाने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहता है। माता के दरबार आस्था के केन्द्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक रहस्यमय और आस्था से परिपूर्ण मां काली का दरबार मंडला जिले के बिछिया विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत अंजनिया में स्थित बड़े तालाब के तट पर स्थापित है। जहां यह दरबार में दोनों पहर विधि विधान से पूजा पाठ और आरती हो रही है। मान्यता है कि यह माता काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुरादे पूर्णं होती है। सच्चाई पर आश्रित लोग अपनी परेशानियों को दूर कराने की मन्नत को लेकर इस मंदिर पर माथे टेकने पहुंच रहे हैं। वर्ष के शारदेय व चैत्र दोनो नवरात्रि पर कलश और जवारे बोकर मां की आराधना करते हैं।
2005 में हुई मंदिर की स्थापना
वैसे तो यह मंदिर के कपाट 12 महीने भक्तों के लिए खुले रहते हैं। लेकिन जब मां के इस नवरात्रि के पर्व पर त्यौहार आता है। तो इस माता काली मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था और भी बढ़ जाती है। मंदिर के पंडा जयचंद कसार से मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि यह मंदिर का निर्माण 2005 में हुआ था तब से ही यहां आज तक जोत जवारे का प्रचलन चलाता आ रहा है। ऐसा करके इस मंदिर में अपनी सेवा दे रहे पंडा जयचंद का कहना है कि उनको इस वर्ष 14 साल पूरे हो चुके हैं।
शनि धाम और सिद्ध बाबा भी स्थापित
मंदिर के बाएं और श्री सिद्ध धाम का दरबार और शनि धाम भी है जिससे यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता काली, सिद्ध बाबा दरबार और शनि धाम के समक्ष माथा टेकर पूण्य लाभ अर्जित करते हैं। मंदिर पर जल रहे कलश आस्था का प्रतीक है। वही स्थानीय भक्तों के अलावा आसपास और दूर-दूर से श्रद्धालु हर वर्ष अपनी समस्याओं को लेकर यहां पहुंचते हैं। माता काली उनकी मुरादे पूरी भी करती है। जिससे वह मन चाहे खुशी में यहां माता काली के मंदिर पर कलश स्थापित करवाते हैं। शारदेय नवरात्रि पर भक्तों पर भक्तों ताता लग रहा है। दोनों पहर विधि विधान से पूजा हो रही है शाम की आरती में भक्त भारी संख्या में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। जहां इस दरबार में पुरुष और महिलाओं को माता काली की सवारी बड़ा मंत्र मुग्ध कर रही है।
जल और सिंदूर चढ़ाना मना
बताया जाता है कि इस माता काली मंदिर के दरबार पर भक्तों को माता के दरबार पर जल और सिंदूर चढ़ाना सख्त मना है। इसलिए यहां पहले से ही बोर्ड में दूर से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए चेतावनी लिख डाली है। ताकि किसी भी कारण वस भक्तों से कोई गलती ना हो जाए।













