- फेल होने के बाद बदल गया रोहित का जीवन
- युवा व महिलाओं को मुश्किलों से उबरने कर रहे मदद
- पढ़ाई के साथ कैरियर की राह दिखाने शुरू की युवा सोच आर्मी
- “युवा सोच आर्मी” के माध्यम से नारी साहसी अभियान चलाया
Highlights
रोहित कुमार जोगी ( Rohit Kumar Jogi ) की एक असफलता ने उसके पूरे जीवन को बदल दिया। रोहित कुमार के जीवन में फेलियर ने बड़ा बदलाव लेकर आया। उसके बाद लोग मुश्किलों से कैसे उबरे, इस बारे में सोचने लगें और इसी सोच के साथ “युवा सोच आर्मी” की शुरुआत की। वह लोगों को जीवन में आगे बढऩे में मदद के साथ महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का कार्य शुरू कर दिए। जिसके बाद सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर हो गई।
उत्तर प्रदेश महावीर न्यूज 29. अपने जीवन में कुछ कर गुजरने की चाह रखते हुए युवा नई ऊंचाईयों को छूने उड़ान भरते है, लेकिन इस उड़ान में ब्रेक लग जाए और वह उन ऊंचाईयों को छूने के रास्ते में फेल हो जाए तो वह युवा हताश और निराश हो जाते है। आज हम एक ऐसे ही युवा की बात कर रहे है, जो 12वीं की परीक्षा में फेल होने के बाद हताश हो गया। उत्तरप्रदेश जेवर के पास गाँव स्यारौल के रहने वाले रोहित कुमार जोगी के साथ भी ऐसा हुआ। रोहित कुमार जोगी का जन्म आदर्श ग्राम स्यारौल के नाथ सम्प्रदाय के सुप्रसिद्ध जोगी परिवार में हुआ। रोहित 12वीं की परीक्षा में फेल हुए तो जीवन में आगे बढऩे के रास्ते मानो बंद से हो गए, लेकिन पिता की हिम्मत और उनके साथ ने मानो रोहित का जीवन ही बदल दिया। अब रोहित दूसरों को हिम्मत और मुश्किलों से उबरने में मदद कर रहे है।
रोहित कुमार जोगी ( Rohit Kumar Jogi ) ने बताया कि पिता मास्टर चंद्रपाल सिंह ने हिम्मत दी। निराशा से उबरकर आगे पढ़े और एक स्कूल में पढ़ाना शुरु किया। महावीर न्यूज 29 के डॉयरेक्ट से बातचीत के दौरान रोहित ने बताया कि हताश होने के बाद पिता ने हिम्मत दी और फिर पढ़ाई शुरू की, इसी दौरान रोहित को ख्याल आया कि अपनी पढाई के साथ युवाओं को कॅरियर की राह दिखाई जाए, जिससे उन्हें ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। इसी सोच के साथ उन्होंने “युवा सोच आर्मी” रजिस्टर्ड कराई। अब लोगों को मुश्किल परिस्थितियों से उबरने और सोसाइटी में अपना योगदान देने में मदद कर रहे हैं।
2016 में शराबंदी मुहीम व किसान आंदोलन से जुड़ें
रोहित कुमार जोगी कम उम्र में ही समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़ गए थे। 10 वीं क्लास में महज 16 वर्ष की उम्र में ही ग्रेटर नोएडा के जेवर इलाके में शराबबंदी मुहीम में शामिल हुए। रोहित जोगी ने बताया कि साल 2016 में आसपास का माहौल देखता था। लोग शराब पीकर लड़ते थे। चुनाव में लोग बच्चों की शिक्षा और बिजली के बजाए शराबंदी की मांग करते थे, तो मुझे लगा कि यदि शराबबंदी हो जाए तो लोगों की प्राथमिकता में एजूकेशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं रहेंगी और वह उनकी उपलब्धता कराएंगे। इसीलिए लगा कि मुझे इस मुहीम से जुडऩा चाहिए। तब गांव में महिलाओं द्वारा हमें शिक्षा दो, शराब छोड़ो नारे के साथ जागरूकता रैली निकाली गई।
पिता ने बढ़ाई रोहित की हिम्मत
रोहित कुमार जोगी ने बताया कि समाज सेवा के ही दौरान उन्हें भारतीय किसान यूनियन से जुडऩे का मौका मिला। उन्हें लगा कि यूनियन के माध्यम से वह अपनी बात घर-घर तक पहुंचा सकते हैं। उनके पिता मास्टर चंद्रपाल सिंह ने भी उनका सपोर्ट किया। वह टीचर रहे हैं। अब वह बिजनेसमैन है। रोहित कहते हैं कि उनके पिता कहते थे कि जिसके पास शिक्षा होगी, उसका परिवार उन्नत होगा। इससे भी उनकी सोच को ताकत मिलती थी।
ये है रोहित के जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष
रोहित कुमार जोगी ( Rohit Kumar Jogi ) साल 2018 में 12वीं कक्षा की परीक्षा में फेल हो गए। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था। परिवार का सपना था कि बेटा फौजी बने। वह कहते हैं कि तब चारो तरफ से रास्ते बंद हो गए थे। लोगों से नजरें चुराना शुरु कर दिया था। तब पिताजी ने समझाया कि ये जिंदगी का छोटा सा मोड़ है। तुम कुछ अच्छा कर सकते हो। फिर एक स्कूल में पढाना शुरु किया। बच्चों को पढ़ाने के दौरान ख्याल आया कि यदि युवाओं के लिए काउंसलिंग शुरु की जाए तो उनके टैलेंट को दिशा मिलेगी। रोहित कहते हैं कि फेल होने के बाद ही पता चलता है कि आप कितने पीछे हो जाते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने युवा सोच आर्मी की शुरुआत कर दी। साल 2021 में उसे रजिस्टर्ड होते ही पाँच हजार पौधें लगाए, वृक्षारोपण अभियान चलाकर समाज को जागरूक किया। रोहित कुमार जोगी वर्तमान में उत्तर प्रदेश के एक कॉलेज से एमएसडब्ल्यू ( MSW) की पढ़ाई कर रहे हैं।
स्लम एरिया के बच्चों को फ्री एजूकेशन देते है जोगी
रोहित कुमार जोगी ने बताया कि हमारी संस्था (“युवा सोच आर्मी” ) एक सामाजिक संस्था है। हमारा मकसद समाज का सशक्तिकरण करना है। हमारी संस्था जागरूकता अभियान के माध्यम से अलग अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। साल 2020 में महिलाओं को काफी संख्या में नारी साहसी अभियान चलाकर सेनेटरी पैड वितरित किये गए। दिल्ली-एनसीआर के स्लम इलाके में बच्चों के लिए शिक्षा पे चर्चा मुहिम के जरिए जगह-जगह फ्री पढ़ाना शुरु किया। दिल्ली यूनिवर्सिटी व एमिटी यूनिवर्सिटी के करीब एक हजार स्टूडेंट्स सोशल इंटर्नशिप करने आते है।
कोविशील्ड वैक्सीन के ट्रायल का भी रहे हिस्सा
जोगी कहते हैं कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए कोविशील्ड वैक्सीन आई तो उसके ट्रायल में शामिल हुए। 11 वालंटियर्स में वह भी एक थे। दिल्ली स्थित एम्स हॉस्पिलट में वैक्सीन की डोज ली थी। रोहित कहते हैं कि सोशल वर्क के दरम्यान सम्मान मिलना शुरू हुआ। 100 से अधिक पुरस्कार अपने नाम अभी तक कर चुके हैं।
महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
रोहित कुमार जोगी ( Rohit Kumar Jogi ) ने बताया कि वर्ष 2022 में “युवा सोच आर्मी” के माध्यम से नारी साहसी अभियान शुरु किया। इस अभियान के माध्यम से 2000 महिलाओं को ट्रेनिंग देने शुरू किया। अभियान के माध्यम से महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई कि वह कैसे अपना प्रोडक्ट आनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से बेच सकती हैं। उनमें से 100 महिलाओं को 5000-5000 रुपये दिए गए। जिससे वह अपना खुद का काम शुरु कर सकें। उनमें से तमाम महिलाएं अलग-अलग काम कर रही हैं। किसी ने सिलाई-कढ़ाई का काम शुरु किया तो कोई अचार, साबुन, मोमबत्ती बनाने का काम कर रही है। महिलाओं को समझाया गया कि कैसे गोबर के उपलों की पैकिंग करके आनलाइन बेचा जा सकता है। इस प्रोग्राम में ग्रेटर नोएडा और अलीगढ़, मथुरा, पलवल हरियाणा की महिलाएं शामिल थीं।


















