- खाद के लिए परेशान हो रहे किसान
- कर्मियो की कमी, लग रही लंबी कतार
- खरीफ फसल की तैयारी में जुटे किसान
- किसानो को मानसून का इंतजार

मंडला महावीर न्यूज 29. मानसून की दस्तक जरूर 20 जून के बाद होगी, पर प्री-मानसून की आहट को देखते हुए किसान अब खेतों में फिर जुट गया है। रबी फसल के बाद अब खरीफ फसलों का समय आ चुका है। अब मानसून की बारिश को ज्यादा समय नही बचा है इसलिए खेतों की साफ-सफाई कर उसमें गोबर खाद सहित अन्य रासायनिक उर्वरक इंतजाम कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इसके साथ ही सोसाइटियों से खाद का अग्रिम उठाव कर गोदामों में रख रहे है। मानसून आते ही किसानी कार्य में तेजी आ गई।
इस वर्ष मौसम विभाग के अनुसार अच्छी बारिश के संकेत भी दिए गए हैं। इसके चलते किसान अपनी खरीफ फसल की तैयारी में पूरी तरह जुट चुके हैं। इन दिनों किसान खेतों की जुताई, समतलीकरण के साथ-साथ खेतों की सफाई करने में लगे हुए है। कई किसानों ने अपने खेतों की जुताई कर उसे छोड़ दिया हैं, ताकि खेतों में रहने वाले जीवाणु मर सकें। कई किसान खेतों की उर्वरता को बरकरार रखने गोबर खाद डाल रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस साल पड़ रही तेज गर्मी से अच्छी वर्षा की उम्मीद है किसान फ्री मानसून के पहले किसान अपने व्यवस्था में जुट गए है। 16 जून के बाद मानसून का आगमन हो जाएगा। इसको ध्यान में रखते हुए किसान सोसायटी व विपणन कार्यालयों से खाद खरीद कर ले जा रहे है।
ग्राम खैरी में स्थित सहकारी विपणन संघ मर्या. कार्यालय का जायजा लिया यहां किसान परेशान दिखाई दिए अपने हाथ में गमछे लेकर अपने आप को हवा करते दिखाई दिए। इस संबंध में किसानो का कहना हैं कि विपणन कार्यालय खैरी में स्टॉफ की कमी है जिसके चलते यहां किसान परेशान हो रहे है। किसान अन्नदाता है और वही अन्नदाता खाद्य के लिए बड़ी मशक्कत कर रहे। सरकार ने किसानों को खाद्य वितरण करने के सख्त निर्देश दिए है लेकिन मुख्यालय के कार्यालय के स्टॉफ के सुस्त रवैया के चलते किसान परेशान हो रहे हैं। किसान रामबाबू ने बताया कि उनको एक हेक्टेयर पर सिर्फ पांच बोरी खाद दिया गया है। उनकी मां के नाम से जमीन है जिनकी उम्र 60 से ज्यादा हो गई है इस वजह से सोसायटी से खाद देने से मना कर दिया है। वहीं किसान हजारीलाल ने बताया कि यूरिया नहीं दिया जा रहा है वहीं डीएपी भी कम बोरी दे रहे हैं। इससे समय पर खाद नहीं मिला तो फसल बोने में समस्या आएगी।
मटका तो है लेकिन नही है पानी
किसानों ने आरोप लगाया है कि विपणन कार्यालय खैरी में भीषण गर्मी को देखते हुए मटका रखा गया है लेकिन मटके में पानी नही है। कुल मिलाकर विभाग औपचारिकता निभा रहा है। किसानों को खाद्य उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सख्त निर्देश जिम्मेदारों को दिए है इसके बावजूद भी किसानों कोई सुविधा नही दी जा रही है। दूर दराज के किसान रोजाना सुबह से लंबी लाईन लग रहे है साथ ही कुछ किसान भूखे प्यासे मुख्यालय पहुंच रहे है जिन्हें काफी मशक्कत करना पड़ रहा है।
खाद्य विक्रय के शासकीय रेट
1. यूरिया – 266.50
2. डीएपी – 1350
3. सुपर फॉस्केट (पाउ) – 440.75
4. एनपीके – 1470, 1172, 1200
प्रति किसान को एक हेक्टेयर में खाद्य विक्रय
यूरिया – 5 बोरी
डीएपी – 2 बोरी
एनपीके – 1 बोरी












