पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत

  • पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत
  • पूजन अर्चन कर ली 108 परिक्रमा

मंडला महावीर न्यूज 29. पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा। इसी दिन शनि जयंती भी मनाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थीं। सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र और सुख शांति की कामना की। वहीं नव विवाहिताओ ंमें वट सावित्री पूजा को लेकर खासा उत्साह देखा गया। वट वृक्ष को मौसमी फल अर्पित करने, कच्चे सूत से बांधने और पंखा से ठंडक पहुंचाने के बाद महिलाओं ने आस्था के साथ इसकी परिक्रमा की। पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी।

बताया गया कि वट सावित्री व्रत और शनि जयंती अवसर पर विशेष योग बने। जिसके कारण यह दिन अच्छा रहा है। अमावस्या होने से यह स्नान, दान और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत प्रशस्त दिन के रुप में मान्य है। मान्यता के अनुसार इसी दिन शनि का जन्म हुआ था। ऐसे में इस दिन शनि देवता को प्रसन्न करने के लिए शनि से संबंधित पदार्थों का दान और शनि देवता की विशिष्ट अर्चन किया जाता है।

  • वट सावित्री पूजन करना फलदायक :
    व्रत रखने वाली महिलाओं के अनुसार इस व्रत को सबसे पहले सावित्री ने अपने पति सत्यवान की प्राण को यमराज से वापस मांगकर लाई थीं, तब से इस व्रत को सुहागिन करती चली आ रही है। वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा करती हैं। कहते हैं कि वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है। इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर लेती हैं और सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार करती हैं, जब तक पानी नहीं पीती हैं जब तक वह पूजा नहीं कर लेती हैं। वट सवित्री के दिन महिलाएं त्यौहार की तरह अपने अपने घरों में भोजन के साथ पकवान भी बनाती हैं। वट वृक्ष पूजन में साल भर में जो 12 महिने होते है। उसके अनुसार सभी वस्तुएं भी 12 ही चढाई जाती हैं।
  • व्रत से मिलती है आत्म संतुष्टि :
    महिलाओं ने कहा कि परंपरा का निर्वहन हम सभी का कर्तव्य है। शादी करके जब ससुराल गई तो मेरी सास वट सावित्री व्रत रखती थीं। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैंने भी इस व्रत को रखना शुरू किया। व्रत से आत्म संतुष्टि मिली। अब मेरी बहू भी इस व्रत को रखती है। राजीव कालोनी निवासी रानू कछवाहा ने कहा कि वट सावित्री व्रत पति के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम है। साथ ही व्रत से हम अपनी परंपरा को भी आगे बढ़ाते हैं। सुहाग की लंबी आयु के लिए वट सावित्री व्रत रखा जाता है। व्रत को रखने से मन को शांति भी मिलती है। आने वाली पीढ़ी को भी इस व्रत को करना चाहिए।
  • व्रत से पति पत्नि के बीच बढ़ता है विश्वास :
    किरणलता का कहना है कि पति की लंबी उम्र को देखते हुए इस व्रत को रखने की परंपरा है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि बरगद के पेड़ में त्रिदेव का वास होता है। त्रिदेव से अपने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ ये व्रत शादी के बाद से ही रख रही हूं। राजीव कालोनी निवासी संध्या ने कहा कि सिर्फ वट सावित्री ही नहीं सभी तरह के व्रत और त्योहार हमारी जिंदगी, समाज और राष्ट्र के लिए मायने रखते हैं। वट सावित्री का व्रत पति-पत्नी के बीच में विश्वास को बढ़ाता है। आज के समय में जब रिश्ते कमजोर हो रहे हैं तो ये तीज-त्योहार इसे और मजबूती देते हैं। पति-पत्नी के बीच विश्वास बढ़ता है तो उसका सकारात्मक असर पूरे परिवार पर पड़ता है। आने वाली पीढ़ी बेटे-बेटियां भी जब रिश्तों की इस मजबूती को करीब से महसूस करते हैं तो उन्हें भी इसके मायने समझ आते हैं। आगे चलकर जब वे भी मुखिया की भूमिका में आते हैं तो ये संस्कार, अपने बच्चों को हस्तांतरित करते हैं।


https://whatsapp.com/channel/0029Va94JfTBlHphmEQSlx1N व्हाटसअप चैनल से जुडऩे के लिए यहां क्लिक करें????
व्हाटसअप चैनल से जुडऩे के लिए यहां क्लिक करें????

Leave a Comment