करोड़ों डकार गए ठेकेदार और अफसर
देवरी कला में जल जीवन मिशन बना ‘मजाक’
- जर्जर टंकी को रंग-रोगन कर छिपा रहे भ्रष्टाचार
- देवरी कला: कागजों में दौड़ रहा ‘नल-जल’
- हकीकत में टपक रही पानी टंकी
- जनसुनवाई के बाद भी कछुआ चाल में काम
मंडला महावीर न्यूज 29. केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना, जिसका लक्ष्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना है, वह मंडला जिले की ग्राम पंचायत देवरी कला (बावलिया) में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। यहाँ करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन आज भी अपूर्ण है और घटिया निर्माण के कारण पानी की टंकी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। आलम यह है कि विभाग के अधिकारी और ठेकेदार अपनी साठगांठ से पुरानी और जर्जर हो चुकी टंकी को महज रंग-रोगन कर नया दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
पंचनामे में खुली पोल: टपक रही है टंकी
ज्ञात हो कि वर्ष 2023 से निर्माणाधीन इस पेयजल परियोजना का लाभ आज तक ग्रामीणों को नहीं मिल सका है। टंकी के निर्माण में इतनी भारी अनियमितता बरती गई कि राजस्व अधिकारियों और पटवारी द्वारा बनाए गए पंचनामे में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि टंकी में पानी भरते ही वह पूरी तरह रिसने लगती है। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि यह टंकी पानी भरने लायक ही नहीं है। उस समय लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अधिकारियों ने नई टंकी बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब उसी जीर्ण-शीर्ण ढांचे को ‘लिप-पोत’ कर दुरुस्त दिखाने का खेल खेला जा रहा है।
जनसुनवाई के आदेश भी बेअसर
पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि करीब 6 माह पूर्व तत्कालीन कलेक्टर सोमेश मिश्रा के पास जनसुनवाई में गुहार लगाने पहुंचे थे। सरपंच, उपसरपंच और पंचों ने आवेदन देकर मांग की थी कि अपूर्ण कार्य को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराया जाए। कलेक्टर के कड़े निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर काम कछुआ चाल से चल रहा है। आज भी गांव के कई घरों में न तो टोटियाँ (नल) लगी हैं और न ही पाइपलाइन का विस्तार हुआ है।
अधिकारी-ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप
ग्राम पंचायत सरपंच देवचरण पद़ाम और संजय सोनी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पीएचई विभाग की मिलीभगत से ठेकेदारों ने करोड़ों रुपये का भुगतान कागजों पर निर्माण दिखाकर करा लिया है, जबकि धरातल पर योजना फेल है। ग्रामीणों को डर है कि मरम्मत की जा रही यह जर्जर टंकी कभी भी धराशायी हो सकती है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने की संभावना है। इसकी गारंटी लेने को कोई भी जिम्मेदार अधिकारी तैयार नहीं है।
पंचायत की मांग: हो उच्चस्तरीय जांच
ग्राम पंचायत ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जर्जर टंकी के स्थान पर नवीन और गुणवत्तापूर्ण टंकी का निर्माण कराया जाए। साथ ही, हर घर तक पाइपलाइन का विस्तार कर सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस भ्रष्टाचार की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘सफेद हाथी’ बन चुकी योजना को कब तक पटरी पर ला पाता है।










