पुश्तैनी जमीन से बेदखली का डर

पुश्तैनी जमीन से बेदखली का डर

कौरगांव के ग्रामीणों को तहसीलदार का नोटिस

  • कलेक्टर से लगाई गुहार
  • तहसील न्यायालय ने जारी किए कारण बताओ नोटिस
  • ग्रामीणों ने पेश किया सन् 1926 का हवाला

मंडला महावीर न्यूज 29. तहसील मंडला के अंतर्गत ग्राम कौरगांव के हल्का पटवारी 89 समेत क्षेत्र के अन्य हल्का में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। तहसीलदार मंडला द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत कई ग्रामीणों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप और भविष्य को लेकर चिंता की स्थिति बनी हुई है।जानकारी अनुसार राजस्व विभाग की कार्रवाई हल्का पटवारी की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि कौरगांव क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से गेहूं की फसल बोकर अतिक्रमण किया गया है। इसी आधार पर तहसील न्यायालय ने ग्रामीणों से स्पष्टीकरण मांगा है कि उनके विरुद्ध बेदखली की कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस जारी होने के बाद ग्रामीण किसानों ने मंडला तहसीलदार को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि इस क्षेत्र में रहने वाले किसान करीब 100 वर्षो से यहां निवासरत है और यहीं खेती किसानी कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे है।

पीढ़ी दर पीढ़ी का कब्जा 

इस नोटिस के विरोध में ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर मंडला जिला कलेक्टर को अपनी व्यथा बताई। आवेदक लीलाधर पिता स्वर्गीय बाजारी कछवाहा, मीनू कछवाहा, भल्लू कछवाहा और अन्य ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वे इस भूमि पर आज से नहीं, बल्कि उनके पूर्वज सन् 1926 से काबिज हैं। उन्होंने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि इसी भूमि पर खेती कर उनकी कई पीढिय़ां जीविकोपार्जन करती आ रही हैं।

किसानों ने की स्थायी पट्टे की मांग 

ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि वे वर्षों से इस भूमि पर मेहनत कर रहे हैं और यही उनके जीवनयापन का एकमात्र सहारा है। उन्होंने मांग की है कि तहसीलदार द्वारा जारी किए गए नोटिसों पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही मानवीय आधार पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए उन्हें उक्त भूमि का स्थायी पट्टा प्रदान किया जाए। इस मामले में ग्रामीणों ने कहां है कि यदि उन्हें उनकी पुश्तैनी खेती की जमीन से बेदखल किया जाता है, तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि उन्हें इस खेती भूमि का स्थाई पट्टा दिया जाए।



 

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