भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी मां की बगिया योजना

मंडला जनपद पंचायत में करोड़ों का घोटाला

मां की बगिया योजना से लेकर साइन बोर्ड तक में भ्रष्टाचार की गूंज

  • भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी मुख्यमंत्री की कल्याणकारी योजना
  • मंडला जनपद सीईओ और अधिकारियों पर गंभीर आरोप, जांच की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत मंडला में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शासन की विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं में करोड़ों रुपये का गबन करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जनपद पंचायत उपाध्यक्ष संदीप सिंगौर और सभापति हरेन्द्र मसराम ने जिला कलेक्टर को सौंपे शिकायत पत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक यंत्री और एपीओ पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल निलंबित करने की मांग की है।जानकारी अनुसार मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री की महत्वाकांक्षी माँ की बगिया योजना जिसका उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार देना था, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। बताया गया कि जबलपुर की नर्सरी से 130 रूपए प्रति पौधे की दर से घटिया पौधे मंगाए गए, जबकि मंडला में इनकी कीमत मात्र 70 से 80 रूपए है। इस खेल में प्रति पौधा 40 से 50 रूपए का घोटाला किया गया। इसके साथ ही फर्जी बिलों के माध्यम से 7 से 8 लाख रूपए का भुगतान किया गया, जबकि वर्तमान में हितग्राहियों के खेतों में लगे अधिकांश पौधे सूख चुके हैं।

सीमेंट पोल और तार सप्लाई हेरफेर 

शिकायत में बताया गया कि जबलपुर से साठगांठ कर 265 के पोल को 375 की दर से सप्लाई किया गया। इसी तरह 75 प्रति किलो मिलने वाले तारों को 104 की मनमानी दर पर सप्लाई कर लाखों का हेरफेर किया गया।

बिना सामग्री सप्लाई किए निकाले फर्जी बिल 

शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि हितग्राहियों के बगिया में पोल लगाने के लिए गिट्टी, रेत और सीमेंट की वास्तविक सप्लाई के बिना ही 10 लाख के फर्जी बिल आहरित कर लिए गए. जमीन पर केवल गड्ढे खोदकर पोल लगा दिए गए. इसके अलावा हितग्राहियों से पौधा खरीदी के नाम पर 15-15 हजार नगद एडवांस भी लिए गए, जिसे हितग्राहियों ने कैमरे के सामने स्वीकार किया है।

वाहन और साइन बोर्ड कार्य में भी भ्रष्टाचार 

जनपद सीईओ द्वारा बिना निविदा के अपने स्वयं के वाहन को लगाकर अपने ही अधीनस्थ कर्मचारी के नाम पर वेंडर नियुक्त कर लाखों रुपये का डीजल भुगतान आहरित किया गया। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों पर दबाव बनाकर 1000 रूपए की लागत वाले घटिया सीमेंट साइन बोर्ड को 3000 रूपए प्रति बोर्ड की दर से जबरन सप्लाई कर भुगतान कराया गया।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग 

जनपद प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्ट अधिकारियों की मनसा के कारण शासन की रीति-नीति केवल कागजों तक सीमित रह गई है, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है. उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि संलग्न बिल एवं वाउचर की जाँच कर संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



 

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